वैद्य ज्योतिविद, संगीतज्ञादि के योग-
01. लग्नेश बुध हो तो वैद्य, ज्योतिर्विद् या दोनों।
02. लग्नेश गुरु हो तो व्याकरण अथवा ज्योतिष का ज्ञाता।
03. लग्नेश के साथ राहु डॉक्टर या वैद्य।
M. भन में राहु ज्योतिर्विद् ।
05. गुरु केन्द्र त्रिकोण में प्रोफेसर।
06. द्वितीयेश बुध शुभ गुरु से दृष्ट गणितज्ञ।
07. तृतीय में गुरु दार्शनिक ।
08. शुक्र तृतीय में संतीतज्ञ या चित्रकला पर्यवेक्षण।
09. मं. गु. तृतीय में शिक्षक।
10. लाभ में सूर्य संगीतज्ञ एवं गायक।
11. धनेश लाभ में ज्योतिषर्विद् ।
12. धनेश का चन्द्र से योग हो तो ज्योतिषर्विद् ।
13. नवम में चतुर्थेश अनेक विद्याओं का ज्ञाता।
14. पञ्चमेश नवम में गाने वाला।
15. पञ्चमेश लाभ में गाने वाला बजाने वाला।
16. तुला वृष लग्न में गुरु और शुक्र केन्द्र में हो तो संगीतज्ञ ।
17. बलवान् अष्टमेश व तृतीयेश किसी भी भाव में स्थित होने पर वैज्ञानिक व अनुसंधानकर्ता अथवा आविष्कारक योग बनता है।
18. धन भाव या धनेश का पञ्चम भाव से या शुक्र से सम्बन्ध होने पर संगीतज्ञ योग बनता है।
19. सूर्य और बुष का घोग पञ्यम में हो, उस पर मंगल की दृष्टि होने पर इंजीनिघर या टेक्निकल ज्ञान होता है।
20. शनि बुध का योग सप्तम भाव में होने पर इंजीनियर बनने का योग होता है।
21. शनि शुक्र की युति से सिविल, इंजीनियर का योग बनता है।
22. चतुर्थ या दशम भाव में चन्द्र मंगल और शनि का योग होने पर सिविल इंजीनियर बनने का योग होता है
23. यदि सूर्य और मंगल दोनों ही कारक होकर केन्द्र में हो तो इलेक्ट्रिकल इंजिनियर होता है।
24. मंगल राहु का योग हो तो मेकेनिकल इंजीनियर होता है।
25. चन्द्र एवं शनि दोनों कारक होकर केन्द्र त्रिकोण में होतो फॉरिस्ट इंजीनीयर होता है।
26. बुध 1,4,5,7,9,10 केन्द्र (त्रिकोण) हो तो ज्योतिषविंद्
27. गुरु केन्द्र या त्रिकोण में हो तो ज्योतिर्विद्य फलित होता है।
28. कर्क राशिस्थ गुरु धन भाव में फलित ज्योतिषी बनाता है।
29. सूर्य या मंगल धनेश हो गुरु या शुक्र से दृष्ट हो तो फलितज्ञ होता है।
30. गुरु स्वराशि के नवमांश में हो तथा कारकांश कुण्डली में पञ्चम में गुरु अथवा बुध हो तो फलितज्ञ होता है।
31. नवम व पञ्चम में चन्द्र गुरु का योग हो तो हस्त रेखा का जानकार या कवि होता है।
32. बुध शुक्र का योग पञ्चम अथवा सप्त्म में हो तो ज्योतिषर्विद् होता है।
33. बुध स्वराशि व मित्र राशिस्थ होने पर गणितज्ञ, संगीतज्ञ या ज्योतिषर्विद् होता है।
34. मकर राशिस्थ गुरु पर बुध शुक्र की दृष्टि से विद्वान होता है।
35. चतुर्थेश चतुर्थ में हो अथवा चतुर्थ भाव शुक्र युत दृष्ट हो तो वादन भूमिका योग होता है।
36. द्वितीय भावस्थ चन्द्र मंगल पर बुध की दृष्टि हो तो गणितज्ञ ।
37. पञ्चमस्थ मंगल पर चन्द्र और बुध की दृष्टि से गणितज्ञ।
38. गुरु दशमेश हो तो गणितज्ञ
39. पञ्चमेश और बुध उच्चरशिस्थ हो गुरु लग्न में शनि अष्टम में हो तो गणतिज्ञ होता है।
40. पञ्चमेश बली हो सूर्य और शुक्र से दृष्ट हो तो व्याकरण शास्त्रज्ञ होता है।
41. शुक्र लग्न में या मिथुन राशि का हो तो व्याकरण शास्त्रज्ञ होता है।
42. गुरु केन्द्र त्रिकोण में हो तो वेदान्त शास्त्र का ज्ञाता होता है।
43. पञ्चमेश सूर्य का धनभावस्थ वेदान्तन्न होता है।
44. 2,3,9,11 ने भाव में बुध अथवा (शा) शुक्र पेपरात होता है।
45. बुध शुक्र का योग केन्द्र या त्रिकोण में काव्य करने वाला होता है।
46. दशमेश लग्नेश का योग होने पर कविता करने वाला होता है।
47. 11वें स्थान का स्वामी स्वराशिस्थ 11वें भाव में हो तो कविता करने वाला होता है।
48. गुरु केन्द्रस्थ हो अथवा पापग्रह के साथ त्रिकोण में हो तो तंत्रशास्त्रज्ञ होता है।
49. पञ्चमेश 10 अथवा 11 वें भाव में हो तो संस्कृत भाषा का ज्ञानी होता है।
50. केन्द्र त्रिकोण में बलवान् पञ्चमेश हो तो संस्कृतज्ञ होता है।
51. पञ्चम भाव में सूर्य या मंगल हो तो चिकित्सक होता है।
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