Tuesday, June 16, 2026

दीर्घायु योग 

*  लग्न-लग्नेश, अष्टम, अष्टमेश, तृतीयेश और शनि इनमें निर्बलता आने पर अल्पायु योग बन जाता है। इनमें से जितने लग्न लग्नेशादि बलवान हों उसके अनुपात से अल्पायु मध्यायु दीर्घायु का विचार करें। 32 तक अल्पायु आदि के अन्ययोगों का भी विचार कर तथा उस समय साढ़े साती या ढैया शनि का भी विचार अवश्य करना चाहिए।
01. अष्टमेश स्वक्षेत्री हो या शनि अष्टम में हो।
02. अष्टमेश, लग्नेश, दशमेश केन्द्र त्रिकोण में हो।
03. षष्ठेश व्ययेश दोनों लग्न में दशमेश या लग्नेश केन्द्र में
04. बलवान् लग्नेश केन्द्र में हो।
05. 3.4.8 भावों में सभी ग्रह हो।
06. लग्न से पंचम में चन्द्र मंगल दशम में गुरु त्रिकोण में हो।
07. पापग्रह 3,6,11 भाव में शुभग्रह केन्द्र त्रिकोण में हो।
08. लग्न में बुध, गुरु व शुक्र में से कोई ग्रह हो।
09. लग्नेश, अष्टमेश लग्न में।
10. षष्ठेश अष्टमेश लग्न में।
11. केन्द्र में शुक्र हो।
12. चतुर्थ में शुक्र हो।
13. षष्ठ में राह हो।
14. अष्टम में गुरु हो या शुक्र हो या केतु।
15. नवम में सूर्य हो अथवा लाभ में सूर्य हो या बुध हो या लाभ में शनि हो।
16. 2,1,5 भाव में लग्नेश हो।
17. अष्टम में लग्नेश हो।
18. लग्न में शुभ ग्रह हो।
19. अष्टमेश अष्टम में या एकादश भाव में।
20. नवमेश लाभ में हो या दशमेश लाभ मे हो।
21. लाभेश 4,8,10,11 भाव में हो।
22. व्ययेश लाभ में हो।
23. द्वितीय भाव में सूर्य बुध हो।
24. लग्न में सूर्य शुक्र अथवा बुध मंगल हो।
25. लग्न में गुरु हो।

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