Friday, June 19, 2026

द्विभार्या योग -

सप्तम में मंगल पर शनि की दृष्टि हो, सप्तमस्थ शनि चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो। अष्टमेश लग्न या सप्तम भाव में हो। लग्नेश लग्न में हो। लग्नेश 6वें भाव में हो। शुक्र यदि नीच, अस्त, या पापाक्रान्त हो। यदि सप्तम में अनेक पापग्रह हो अथवा द्वितीय भाव में अनेक पापग्रह हो तो 3 विवाह होते हैं। सप्तमेश से 1,4,7,8,12 वें भाव में पापग्रह हों तो अनेक स्त्रियों से सम्पर्क होता है।

यदि सप्तमेश या द्वितीयेश या शुक्र पापग्रह के साथ 6,8,12 वे भाव में हो तो एक स्त्री के मरने के बाद दूसरा विवाह होता है सप्तम में मिथुन का शुक्र से बहुस्त्रीगामी। बली शुक्र से सप्तम भाव दृष्ट होने से बहुस्त्रीगामी। भौमक्षेत्रीय शुक्र भौम से दृष्ट होने से बहु स्त्रीगामी।

01. लग्नेश सप्तमेश से निर्बल हो।

02. सप्तम में पापग्रह और धनेश नवम में हो।

03. अष्टमेश लग्न वा सप्तम में।

04. सग्न गा साजम में लग्नेश सग्जमेश का गोग।

05. सप्तम भाव 3,4, पापग्रहों से युत दृष्ट हो।

06. सप्तम में पापग्रह और लग्नेश, धनेश, षष्ठेश का परस्पर संबंध हो।

द्विभार्या योग (प्रथम स्त्री मरण पश्चात् )

01. सप्तमस्थ मंगल पर शनि की दृष्टि हो।

02. सप्तमस्थ शनि चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो।

04. लग्नेश लग्न में हो अथवा लग्नेश एष्ठ भाव में हो।

05. शुक्र नीच, अस्त, व पापाक्रान्त हो।

06. सप्तम में या द्वितीय भाव में अने पापग्रह हों तो 3 विवाह।

07. सप्तमेश से 1,4,7,8,12 वें भाव में पापग्रह हों तो अनेक स्त्री से संबंध।

08. यदि सप्तमेश या द्वितीयेश या शुक्र पापग्रह के साथ 6,8,12 वे हों तो 1 स्त्री के मरने के बाद दूसरा विवाह होता है।।

09. सप्तम में मिथुन का शुक्र बहुत स्त्रियों से सम्पर्क (धर्नुलग्न में)।

10. सप्तम भाव को बलवान शुक्र देखता हो।

11. बलवान चन्द्र और शुक्र की युति हो।

12. मेष व वृश्चिक राशि में शुक्र मंगल से दृष्ट हो।

13. सप्तमेश तृतीय स्थान में चन्द्र गुरु से दृष्ट हो तो. बहुत स्त्रियों से संबंध होता है।

14. सप्तमेश से तृतीय स्थान में या 7 वे स्थान में चन्द्र से अनेक से संबंध ।
15. सप्तमेश शनि हो, तो अनेक स्त्री का संबंध।
16. मंगल और शुक की परस्पर दृष्टि से प्रेम विवाह।
17. पंचमस्थ शुक्र सप्तमेश से संबंधित हो तो प्रेम विवाह।
18. सप्तमस्थ चन्द्र मंगल से दृष्ट हो तो संबंध विच्छेद।
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19. पंचमेश और सप्तमेश की युति हो अथवा अन्योन्य राशिगत से प्रेमविवाह।
20. मंगल और शुक्र की युति से अत्यन्त कामी हो।
21. कन्या का सूर्य लग्नस्थ अथवा मीन का सूर्य सप्तमस्थ पत्नी के लिए अनिष्ट कारक योग होता है।


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