शीघ्र वैधव्य योग-
द्वितीय भाव और द्वितीयेश, बुध तथा गुरु पर मं, श, के, श. का प्रभाव होने पर शीघ्र ही वैधव्य योग प्राप्त हो जाता है। स्त्री की कुण्डली वृषलग्न की है दूसरे भाव में शुक्र 12 वें में राहु तीसरे में सूर्य 4थे में बुध, गुरु, षष्ठ में केतु मंगल, सप्तम में चन्द्र और नवम में शनि स्थित है। यहाँ द्वितीय भावेश बुध और सप्तम भाव के कारक गुरु पर राहु की पंचम दृष्टि पड रही है तथा द्वितीय भाव पर केतु की नवम दृष्टि पड़ रही है अत- द्वितीय भाव तथा भावेश बुध एव सप्तम का कारक गुरु तीनों पर पापदृष्टि होने से वैधव्य योग बन रहा है, किन्तु शीघ्र वैधव्य योग को बुध प्रदर्शित कर रहा है। क्योंकि बुध की कुमार अवस्था होती है तो जो जीवन के बाल्यकाल में ही प्रभावित होता है। अतः विवाह के अतिशीघ्र वैधव्य की प्राप्ति करवाता है
सुन्दर पति, पत्नि प्राप्ति योग-
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यदि सप्तम भाव में समराशि हो तथा सप्तमेश और शुक्र भी समराशि में होने पर और अष्टम अष्टमेश शनि की दृष्ट में नहीं होने पर सुन्दर स्त्री की प्राप्ति होती है स्त्री की कुण्डली में सप्तम भाव और भावेश पुरुष राशि में होकर गुरु आदि शुभ पुरुष राशि ग्रह से दृष्ट होने पर सुन्दर पति की प्राप्ति होती है।
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