केतु की पहचान
१ जातक के ललाट के मध्य से दाई और चोट अथवा कटने का चिन्ह होना।
२ आँखे अंदर धसी हुई देखने में भयानक लगती है।
३ आँखें गोल और लाल प्रतीत होती है।
४ जबड़े की हड्डिया साफ दिखाई दे , गाल पे गड्डे पड़े हो।
५ हड्डियां मजबूत परन्तु जोड़ सुगठित नहीं होंगे
६ अधिक वाचाल, बोलते समय आँखे बहार की और निकलती प्रतीत हो।
७ बात बात में धर्म मन्त्र भूत प्रेत की बातों में रूचि।
८ दूसरे भाव का केतु स्वरभंग रोग उत्पन्न करता है।
९ तीसरे भाव का केतु कर्ण व्याधि उत्पन्न करता है।
१० पंचम भाव का केतु पेट के रोग एवं संतान पक्ष के लिए कष्टदायी होता है।
११ छटे भाव का केतु राशि जनित समस्या देता है
१२ सातवे भाव का केतु दाम्पत्य में बढ़ा उत्पन्न करता है एवं संबंधित रोग का कारन होता है।
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