गदा योग-
यदि समीपस्थ दो केन्द्रों प्रथम चतुर्थ, चतुर्थ सप्तम अथवा सप्तम दशम भावों में ही सभी ग्रह हो तो 'गदा' योग होता है। इस योग वाला जातक धर्मात्मा, धनी, शास्त्रज्ञ, संगीतज्ञ, यज्ञकर्त्ता, मन्त्र-तन्त्र में तत्पर, स्त्री भूषणादि से युत्त, परद्वेषी तथा भयानक होता है। इस योग वाले पुलिस एवं सेना में सर्विस करते हैं। इनका भाग्योदय २८ वर्ष की आयु में होता है।
शकट योग-
यदि सभी ग्रह लग्न तथा सप्तम में स्थित हों तो शकट नाम योग होता है। इस योग वाला जातक कृश शरीरी, दीन, मित्रहीन, ऐश्वर्यहीन, स्वार्थी, मूर्ख तथा रोगी होता है। ऐसा व्यक्ति अपनी स्त्री से दुःखी रहता है और उसके छोड़ने के बाद ही प्रसन्नता प्राप्त कर पाता है। इस योग वाले व्यक्ति ड्राइवरी आदि के कामों में रुचि लेते हैं तथा अपना काम निकालने में बहुत कुशल होते हैं।
पक्षी योग-
यदि चतुर्थ तथा दशम भाव में सभी ग्रह स्थित हों तो पक्षी (विहार) नामक योग होता है। इस योग वाला जातक व्यर्थभ्रमण करने वाला, सुख भोगहीन, सदैव परेदश में रहने वाला, बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बातें करने वाला, कलहप्रिय, डीठ तथा सामान्यतः धनी होता है। इस योग वाले जातक के अन्य ग्रह शुभ हों तो गुप्तचर विभाग का कर्मचारी अथवा राजदूत हो सकता है। यदि उक्त स्थानों में शुभ ग्रह हों तथा तृतीय, षष्ठ एवं एकादश भाव में पापग्रह हो तो योग वाला व्यक्ति मण्डलाधिकारी अथवा न्यायाधीश होता है।
No comments:
Post a Comment