Thursday, June 18, 2026

काहलयोग-

यदि लग्नेश बली हो अथवा चतुथ्श एवं बृहस्पति परस्पर केन्द्रगत हों अथवा चतुर्थेश एवं दशमेश उच्च अथवा स्वराशि में हों तो काहल नामक योग होता है। इस योग वाला जातक, बलवान, साहसी, धूर्त तथा चतुर होता है। ऐसे योग वाला व्यक्ति राजनीति के क्षेत्र में सफलताएँ प्राप्त करता है। यदि नवम भाव तथा चतुर्थ भाव के स्वामी एक-दूसरे के केन्द्र में स्थित हो और लग्नाधिपति बली हो तो भी काहल योग बनता है। इस योग में भी शासन सुख प्राप्त होता है।

भेरीयोग-

यदि नबगेश बली हो तथा लग्न, द्वतीय, सप्तम एवं द्वादश भाव में राभी ग्रह हों अथवा भाग्येश बली हो तथा शुक्र गुरु एवं लग्नेश केन्द्र में हों तो इन दोनों प्रकारों से 'भेरी' नामक योग होता है। इस योग वाला जातक गुणी, सुखी, यशस्वी, आचारवान तथा उन्नतिशील होता है। वह जीवन में निरन्तर उत्कर्ष प्राप्त करता रहता है।

कलानिधि योग-

यदि बुध-शुक्र से युत अथवा दृष्ट गुरु द्वितीय अथवा पंचम भाव में में हो। हो अथवा बुध शुक्र के नवांश में हो तो कलानिधि नामक योग होता है। इस योग वाला जातक स्वस्थ, सुखी, गुणी, धनी, विद्वान तथा राजमान्य होता है।


No comments:

Post a Comment