Thursday, June 18, 2026

गज केसरी योग-

01. चन्द्र से गुरु केन्द्र में हो तो गज केसरी योग बनता है। इसमें चन्द्र से सप्तम में गुरु स्थित हो तो उसे उत्तम गज केसरी योग माना है।

02. पूर्णचन्द्र शुभ नवमांश में हो स्वगृही या उच्च का हो वह पापग्रहों से युत द्रष्ट नहीं हो तो लग्न के अतिरिक्त अन्य केन्द्रों में स्थित होने पर भी गज केसरी योग बनता है।

03. चन्द्र पर बु.बृ.शु. तीनों की दृष्टि होने पर भी गज केसरी योग बनता है। इस योग का फल अत्युत्तम लिखा है।

04. नीच ग्रह का नवमांशेश अर्थात् नीच ग्रह के नवमांश का अधिपति लग्न से केन्द्र त्रिकोण में हो और लग्न 1,4,7,10 राशि का हो तो नीच भंग राजयोग बनकर शुभफल प्रद होता है।


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