लग्नस्थ राहु की पहचान
लक्षणों की पहचान में सावधानी रखना आवश्यक धीरे धीरे अनुभव और अन्य ग्रहो के लक्षणों को याद रखना और उनमे भेद को समझना आवश्यक है।
१ जातक की लम्बाई अधिक होगी।
२ मुख कांतिहीन होगा
३ हाल में रोग से उठे व्यक्ति की भांति दिखेगा।
४ निश्चित रूप से ऊपर के दोनों दांतों के बीच रिक्तता दिखाई देगी।
५ झुर्रियां त्वचा का ढीलापन महसूस होगा।
६ सदैव आगे की तरफ झुक कर चलने वाला होगा।
७ हड्ड़ियों के जोड़ कमजोर प्रतीत होंगे
८ राहु के १२वे और २सरे खाने में होने से भी दांतो के बिच रिक्तता पायी जाती है
१० ऐसा जातक सदैव अपने कपड़ो पर अवश्य ध्यान देगा चाहे पुराने हो।
११ राहु लग्नस्थ का मुख धसा हुआ प्रतीत होगा बनावट नोकदार और पतला होता है।
१२ आँखे सदैव बेजान ही होगी ,बोलने पर आँखों पर बल पड़ता दिखाई देगा ,
१३ आंखों में कीच चिपके होने की झलक अवश्य होगी , जिसे जातक बार अंगुली से साफ करने की चेष्टा करता होगा।
१४ सामाजिक व्यवस्था ,रहन सहन एवं चाल चलन के प्रति सजग होता है।
१५ आस्तिक होता है पर धर्म की विषय पर स्वयं से विषय का प्राकट्य नहीं करता है।
१६ द्वितीय भाव में राहु हो तो कर्कश कड़वी बातें अथवा चापलूसी करने लगेगा।
१७ बलवान राहु के लक्षणों को पढ़ने में सावधानी चाहिए परन्तु कमजोर राहु सहज पकड़ में आ जायगा।
१८ तृतीय भाव का राहु जातक को अति निर्भीक बना देता है।
१९ चतुर्थ भाव में राहु होने से जातक की छाती दबी होगी अर्थात सुडोल नहीं हो कर आँखों में सहज खटकने वाली होगी।
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