Friday, June 19, 2026

द्विग्रही योग-

सूर्य चन्द्र- 

क्रूर कर्म में निपुण, घमण्डी, पत्थर के यन्त्र आदि के व्यापार में चतुर, निरन्तर कामी (शुभ.)। अनेक प्रकार के यन्त्र बनाने वाला, पत्थर के काम करने वाला (वृ.जा.) स्त्री के वश रहे, कपट कर्म कर्ता, बड़ा उद्धत, काम करने में बड़ा अदृढ़, पराक्रमी और अल्प मन वाला (मान.)। पत्थर और यन्त्रों को बेचने वाला, माया में चतुर, कामी चाहना सहित, अभिमानी (जा.भ.)।

सूर्य मंगल- 

उत्तम धर्म कर्म तथा धन से हीन रहे, क्लेशों में तत्पर, निरन्तर क्रोध युक्त (शुभ)। पापी (वृ.जा.)। तेजस्वी, पाप में मन, मिथ्याभाषी, बड़ा मूर्ख, भाई बन्दों से प्रेम करने वाला, बड़ा बलवान (मान.)। बड़ा यश बलवान्, मूर्ख, अतिशय उद्धत, झूठ बोलने वाला, साहसी, शूरवीर, (जा.भ.)।

सूर्य बुध-

 प्रिय वाणी, राजमंत्री, सेवा से धन कमावे, शास्त्रों में तत्पर कलाओं के समूह मे चतुर (शंभु.)। सब कार्यों में निपुण, बुद्धि, यश, सौख्ययुक्त (बृ.जा.)। बड़ा विद्वान, राजाओं से मान प्राप्त, देव, ब्राह्मण सेवा में मन, प्रिय भाषी, यशस्वी, स्थिर धन से युक्त (मान.), प्यारी बोली, मंत्री, बहु सेवा कर धन इक्ट्ठा करने वाला, कलाओं में कुशल, शास्त्रों में चतुर (जा.भ.)। सूर्य बुद्ध एक साथ होने से बुद्धादित्य योग होता है। वह धर्मात्मा, पंडित, धनवान, बहुपुत्रवान और सेवकों सहित तथा जितेन्द्रिय होता है। (जैमिनी.)।

सूर्य गुरु- 

पुरोहिताई में चतुर, राजा का मंत्री, मित्रों से पाये धन से सम्पन्न, चतुराई से युक्त, उपकारी (शंभु.) क्रूर स्वभाव निरंतर पराये कर्म में तत्पर (बृ. जा.), राजाओं से सत्कार प्राप्त, स्वधर्म में में निश्रा, मित्रवान, धनवान, विद्या पढ़ने-पढ़ाने वाला, सर्वत्र विख्यात् (मान.)। पुरोहिताई में निपुण राजा का मंत्री, मित्रता का धन को प्राप्त, परोपकार, चतुर,।

सूर्य, शुक्र- 

सद्बुद्धि, संगीत बजे, आयुष कर्म में निपुर्ण, नेत्र शक्ति से हीन, मित्र समाज प्राप्त रहे, (शंभु)। रंग, मल्लादि और आयुध, (हथियार) से धन पावे (बृ. जा.)। शस्त्र से प्रहार करने वाला, जेल में बंधन पाने वाला, नाट्यशाला कीहास्यभरी बातों को जानने वाला, कमजोर नेत्र, परस्त्रियों से संगम में द्रव्य प्राप्ति। परस्त्रियों में फँसा (मान.), नट बनाकर या शस्त्र का प्रयोग करके द्रव्य कमाए (फल.) गाना-बजाना और शास्त्र विद्या में सुन्दर बुद्धि, नेत्रों के बल से रहित, स्त्रीयुक्त, मित्र समाज में पूर्ण (जा.भ.)।

सूर्य शनि-

धर्म में प्रीति, पुण्यबुद्धि, गुणज्ञ, स्त्री-पुत्रों से सुखी, सम्पन्न, अत्गन्त धातु क्रियाओं से युक्त रहे (शंभु.) ताँबा आदि धातु के काम में निपुण, अनेक बर्तन भांड़े आदि का बनाने वाला व इनके द्रव्य पावे (वृ.जा.), विद्वान हो तब भी क्रिया में निष्ठ रहने वाला, धातु का जानने वाला वृद्ध पुरुषों की तरह बर्ताव करने वाला, स्त्री तथा पुत्र से रहित, (मान.) धातु क्रिय व व्यवहार में बुद्धि रखने वाला, गुण का जानने वाला, धर्म प्रिय पुत्र और स्त्री से सौख्य पाने वाला, सदा अत्यन्त समृद्धियों सहित। (जा.भ.)

चन्द्र मंगल-

पुण्य कर्म से जीविका, कुटिल स्वभाव, प्रतापवान्, अपने आचार से हीन, कलह में तत्पर, रोग से पीड़ित, माता का रात्रु (शंभु) क्रूर कर्म, स्त्री व मद के घड़े बेचने वाला, अपनी माता को क्रूर, (बृ.जा.)। रक्त की पीड़ा से व्याकुल, मृत्तिका, धातु तथा चमड़े की कारीगरी जानने वाला, धन्वान, रण में शूर, (मान.), आचार रहित, चुगल, प्रतापी, व्यापार से आजीविका, कलहप्रिय, मातृ वैरी, रोग से दुःखी, (जा.भ.)

चन्द्र बुध-

 सुन्दर रूप, उत्तम कर्म, धन से युक्त, स्त्री में परम आसक्त, अति बोलने वाला, उत्तम वाणी के विलास वाला, कृपा से गीला मन, और छोटा शरीर (शंभु), प्यारी वाणी, अर्थ जानने वाला, सौख्ययुक्त, सबका प्यारा, कीर्तिवान, (बृ.जा.), स्त्री में अति आसक्त, रूप में सुन्दर, कविता करने में चतुर, धनवान, गुणवान, सदा हसमुख, बड़ा विद्वान, अपने कुल में धर्मात्मा, (मान.), श्रेष्ठ वाणी, श्रेष्ठ रूप, दयालु, नरम, स्त्री का अधिक प्रेमी, बड़ा वक्ता, (जा.भ.)

चन्द्र गुरु- 

सर्वदा गूढ़ होवे, गूढ़ बुद्धि, अति मित्रों वाला, परोपकारी, धर्म-कर्म आदि से युक्त, (शंभु), शत्रू जीतने वाला, कुल में श्रेष्ठ, चपल, धनी, (बृ.जा.), देवगुरु पूजन, बन्धुजनों का मान करने बाला, धनवान दृढ़, प्रीत करनेबाला, बड़ा सुशील, (मान.), नम्रतायुक्त, मजबूत, छिपी सलाह करने वाला, अपने धर्म और कर्म में तत्त्पर, परोपकार में चित्त, (जा.भ)।

चन्द्र शुक्क्र-

 उत्तम गन्ध पुष्प, उत्तम वस्तु में मन, वस्त्रादि व्यापार में चतुर, व्यसन वाला, विधि जाननेवाला, (शंभु), वस्त्र कर्म, तंतुवाय-सूत्र बीनना। रफ्फूगिरी व वस्त्ररंगना, सीना और वस्त्र के व्यापार में चतुर (बृ. जा.), चीजों के क्रय विक्रय में चतुर, शूद्र वृत्ति वाला, कलहकारी, अल्प वस्त्र से युक्त, (मान.) वस्त्र आदि के क्रय विक्रय में चतुर, व्यसन रहित, विधि का जानने वाला। सुगन्ध और उत्तम पुष्प, उत्तम वस्त्रों में चित्त (जा.भ.)

चन्द्र शनि- 

पर स्त्री में तत्त्पर, वैश्य वृत्ति से जीविका, सदानार से हीन, पराया पुत्र और पुरुषार्थ से हीन (शंभु.), उसकी माता पुन्भु (एक जगह ब्याही हुई, दूसरी जगह पुत्र उत्पन्न किया) हो, (वृ.जा.), हाथी घोड़े का पालन करने वाला, अल्पपुत्र वाला, वृद्धा स्त्री के संग, वेश्या से धन प्राप्त करे, खोटा स्वभाव (मान.) अनेक स्त्रियों के सेवन की इच्छा, वेश्यावृत्ति, साधु शील से रहित। पर पुत्र और पुरुषार्थहीन, (जा.भ.)।

मंगल बुध -

 मल्लयुद्ध में चतुर, बहुत पुत्रों की अभिलाषा, अनेक प्रकार की औषधि वाला, पुण्य स्वभाव, हीन कर्म, लोह कर्म विधि जानने बाला (शंभु), अत्तार जड़ी वक्कल, फूल पत्ते, गोंद, तेल और बनावटी वस्तु का व्यापार करे। कुश्ती लड़ने वाला (वृ.जा.), निर्धन, विधवा पति, दुर्भाय स्त्री वाला, कण वृत्ति करने वाला, सोने या लोहे का जीविका करने वाला (मान.), मल्ल विद्या में चतुर, बहुत स्त्रियों को लालसा, अनेक औषधियों का व्यापार, सोना और लोहे की विधि में वृद्धि वाला (जा.भ.)।

मंगल गुरु 

मंत्र विद्या, अस्त्र शस्त्र के बोध में अत्यन्त निपुण तथा विवेकी, सेनापति राज्य, नगर या ग्राम का स्वामी, ग्रह बल के अनुसार होवे (शंभु), नगर का स्वामी, राजा या ब्राह्मण, धनवान (वृ.जा.), बुद्धिमान, शिल्प शास्त्र को जानने वाला, सुनने मात्र से बात का स्मरण रखे। वाक्य चतुर, घोड़ों से प्यार करने वाला, सबों में प्रधान (मान.), मन्त्र और विहा की कला में चतुर शीलवाला, सेना का स्वामी, राजा या नगर व ग्राम का स्वामी (जा.भ.)

मंगल शुक्र-

 प्रपंच, झूठ धूर्त में प्रीत, अनेक स्त्रियों के भोग में मन, घमंडी, सबके साथ बैर (शंभु), मल्ल गोपालक, चतुर, परस्त्रियों में आसक्त, जुआड़ी ठग, (वृ.जा.) गुणों द्वारा पुरुषों में प्रधान, ज्योतिषी, जुआ खेलने, झूठ बोलने में निरत बड़ा शठ, परस्वियों में आसक्त, सबों में गान्य (मान.), स्त्रियों के भोग विधान में चित्त, जुआ व झूठ में प्रीत, प्रपञ्च में तत्पर, अभिमान रहित, सबसे बैर (जा.भ.)। मंगल शनि- अस्त्र-शस्त्र जानने वाला, युद्ध कर्म में तत्पर, सुखहीन और लोक में अति निन्द्य होवे (शंभु.), दुःख कारक, झूठ बोलने वाला, निंदित काम करने वाला, (वृ.जा.), प्रशस्त वाणी, इन्द्रजाल में निपुण, अपना धर्म छोड़कर अन्य धर्ममानने वाला, कलह प्रिय, विश्वासघाती, विष तथा मदिरा के झगड़ों में रहने वाला (भान.), जस्त्र और शरत्र नन जााने नाता, पुद्ध करने नाला, चोरी छूट में प्रीत, सदा सौख्य रहित (जा.भ.)।

बुध गुरु- संगीत जानने वाला, नीति का स्वामी, नम्र, अधिक सुखी, उत्तम गुण, धीर सुगन्धित वस्तु प्रिय, उदार (मान.), गान विद्या का ज्ञाता, नम्र, सौख्य युक्त, अति श्रेष्ठ धैर्यवान, निरन्तर उदार, सुगंध का भोग भोगने वाला (जा.भ.)।

बुध शुक्र- उत्तम वाणी का विकास, गुणवान, विवेकी, सदा प्रसन्न, अपने कुल में श्रेष्ठ, सुन्दर वेश, बहुतों का स्वामी (शंभु), बोलने में चतुर, भूमि और गुणों का स्वामी, (बृ.जा.), नीति शास्त्र का ज्ञाता, अनेक प्रकार की कला में कुशल, धनवान, सुन्दर वाक्य, वेद ज्ञाता, हास्य की लालसा (मान.), कुल में प्रतापी, श्रेष्ठ वाणी, सदा हर्षयुक्त, श्रेष्ठ वेष, नम्रता युक्त, बहुत नौकर, गुणवान, चतुर (जा.भ.),

बुध शनि- कलह प्रिय, चंचल चित्त, कला के समूहों में चतुर, बहुतों का पालन करने वाला, परम सुशील (शंभु), दूसरे को ठगने में चतुर, गुरु आदि के वचन का उल्लघन करने वाला (बृ.जा.), दुर्बलांग, चलने के स्वभाव, उपाय रहित सबसे कलह करने वाला, सुन्दर वाक्य बोलने वला, काम करने में चतुर, (मान.), चंचल स्वभाव, कलाप्रिय, कला के रामूहों में चतुर, श्रेष्ठ वेष, बहुत मनुष्यों का पालक, (जा.भ.)

गुरु शुक्र 

स्त्री, धन, मित्र, पुत्रादि से सदा सुखी, विद्या में पंडित, श्रेष्ठों से अत्यन्त शास्त्रार्थ करे (शंभु), अच्छो विद्या जानने वाला, धन और स्त्रीयुक्त, बहुत गुणों से युक्त (बृ.जा.), सुन्दर स्त्री, धनवान, धर्म में आस्तिक, प्रमाण जानने वाला, विद्या से आजीविका (मान.), विद्या से पंडित, सदा पंडितों से विवाद करने वाला, पुत्र, मित्र और धन के सौख्य से युक्त (जा.भ.),

गुरु शनि-

 अधिक यश, ग्राम नगर का स्वामी, स्त्री के पक्ष में सन्देही, मनोरथ सिद्ध, शूरमा, धनवान, कला जानने वाला (शंभु), नाई या कुम्हार, अन्नकार रसोई बनाने वाला हो, (बृ.जा.), जीविका से युक्त, बड़ा शूरवीर, यशस्वी, नगर का स्वामी, नगर के जनों में या सेना के जनों में मुख्य, (मान.), शूरवीर, धनवान, ग्राम व नगर का स्वामी, यशवाला, कलाओं में कुशल, स्त्री के आश्रय से मनोरथ पूर्ण करने वाला (जा.भ.)

शुक्र शनि- 

उत्तम शील, लेखन विधि से उत्पन्न, खेल से युक्त, पत्थर के कामों मेंचतुर, चंचल बुद्धि, लकड़ी चीरने वाला (शंभु), अल्प दृष्टि, स्त्री के आश्रय से धन बढ़े, पुस्तक आदि लिखने में चित्र बनाने में चतुर, (बू.जा.), सदा मतवाला, पशु पालन करने वाला, बढ़ई के काम में चतुर, खारा या खट्टे पदार्थ का प्रेमी, कारीगरी जानने वाला (मान.), शिल्प शास्त्र और लेखर विधि में चतुर, कौतुकी, घोर युद्ध करने वाला, पत्थर के काम में चतुर।


No comments:

Post a Comment