Thursday, June 18, 2026

कूट योग-

यदि चतुर्थ भाव से आरम्भ करके लगातार सातों भावों में सातों ग्रहों की स्थिति हो तो कूट' नामक योग होता है। इस योग वाला जातक शठ, क्रूर, धनहीन, नीचकर्म करने वाला धर्माधर्म का विचार न रखने वाला, वनवासी जीवन में रुचि रखने वाला तथा भीलादि वन्यजाति के लोगों से प्रेम करने वाला होता है। ये लोग भवन, पुलादि बनाने की कला में कुशल तथा जेल कर्मचारी भी होते हैं।

चाप योग-

यदि दशम भाव से आरम्भ करके अगले सात भावों में सातों ग्रहों की स्थिति हो तो चाप योग होता है। इस योग वाला जातक धनुष विद्या में निपुण, वन पर्वतों में भ्रमण करने वाला, गवोन्मत्त अत्यन्त दुष्ट स्वभाव वाला, मिथ्यावादी, भाग्यहीन होता है। इसे बाल्यावस्था एवं वृद्धावस्था में ही सुख प्राप्त होता है। इस योग जातक वन- विभाग, पुलिस-विभाग, गुप्तचर विभाग अथवा जेल विभाग के कर्मचारी होते हैं।

इस योग वालों को तन्त्र मन्त्रादि की सिद्धि भी हो सकती है।


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