दशमेश का अन्य भावेशों से युतिफल -
दशमेश लग्नेश का योग होने पर जातक स्वावलम्बी जीवन पैतृक व्यवसाय कर्ता धनेश से योग होने पर सूदखोरी (ब्यान पर रुपैया देना) से। तृतीयेश से योग होने पर साहस व जोखिम पूर्ण कार्य से टेवलिंग, विजय प्रतिनिधि, डिलीवरी मैन, परिवहन कर्मचारी तथा भ्रमणशील धन्धे से धन लाभ, धनेश से योग हो तो जमीन जायदाद संबन्धी कार्य कर्ता। पञ्चमेश से योग होने पर राज्याश्रत जीवन, बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यकर्त्ता, शिक्षक, पाठ पूजा मठ मन्दिर आदि से सम्बन्धित कार्य षफ्रेश के साथ होने पर डाक्टर, जेलर, वकील, जज, तस्कर गुण्डागीरी के कार्य। सप्तमेश से योग हो तो भ्रमणशील कार्य, रेल, रोडतेज, डाक, तार विभाग, मालवाहक ट्रांसपोर्ट कम्पनी में कार्यरत।
अष्टमेश से योग होने पर धन्धे में रुकावट व अस्थिरता आती है। नवमेश के साथ होने पर धार्मिक क्षेत्र में कार्यरत। लाभेश के साथ बड़े भाई के सहयोग से तथा अनेक धन्धों से लाभ, षष्ठेश के साथ होने पर वैदेशिक धन्धे में से धन लाभ। कन्या राशि का दशस्थ शुक्र सेल काउन्टर पुस्तकालय अध्यक्ष, सिंह राशिस्थ सूर्य मंगल राजनैतिकनेता, सूर्यशुक्र राजदूत, तुला राशि में दशमस्थ शुक्र सिनेमा में कलाकार, फैशन मोडल मूर्तिकार, तुलाराशि दशम में शनिशुक्र की स्थिति पोशाक डिजाईनर कैमरा मैन कार्टूनिस्ट मैनूपमैन। उत्तम राजयोग। गंल राहु शुक्र की युति दशम भाव में तुला राशि के होने पर जुआघर, सट्टेवाजी। वृश्चिक राशिगत चन्द्र दशम में गोताखोर। दशम में सूर्य वृश्चिक राशिगत प्रशासन अधिकारी। दशमस्थ धनुराशि में बुध व गुरु शिक्षक, समाज सुधारक धार्मिक संस्था में कार्यरत। दशमस्थ धनुराशि में बुध गुरु शनि का योग वकील या न्यायाधीश। दशमस्थ मकर राशि में मंगल वैज्ञानिक, भूगर्भ शास्त्री, वनअधिकारी। शनिवली होने पर दशमस्थ मकर राशि में बैंकर जमीदार या व्यापारी। बलवान बुध परामस्थ कुम्भ राशि में नेधावी, जम्नेषपा पा पैशानिक। शनिबुध का पोग परामस्थ कुम्भ राशि में इन्जिनियर, वैज्ञानिक, राज्य में सम्मानित पद पर नियुक्तिः सिंह के सूर्य पर चन्द्र की दृष्टि। मकर कुम्भराशि में सूर्य शनि से दृष्टहा। कुम्भ राशि के चन्द्रको या मीन राशि के चन्द्र को सूर्य देखत हो। मीन राशि के चन्द्र को बुध या शुक्र देखता हो। शुक्र की राशि में मंगल स्थित हो। कर्कराशिगत मंगल को गुरु या शनि देखे। शनि क्षेत्रीय मंगल को गुरु या शुक्र देखता हो। भौमक्षेत्रज बुध को मंगल देखता हो। सिंह राशिगत चन्द्र को सूर्य देखता हो अथवा मंगल गुरु व शनि में से कोई देखता हो। कन्या राशिगत चन्द्र को सूर्य या शुक्र देखता हो। वृश्विक राशिगत चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो। धनु राशिगत चन्द्र को मंगल या सूर्य देखता हो। शुक्र क्षेत्रीय बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो। चन्द्र मंगल गुरु में से कोई मिथुन या कन्या राशि के बुध को देखता हो। गुरु क्षेत्रीय बुध को गुरु या शुक्र देखता हो। बुध क्षेत्रीय गुरु पर शनि की दृष्टि हो तो राजकार्य के योग बनते है।
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