दशम में द्विग्रह योग-
दशम में सूर्य चन्द्र
सुन्दर शरीर, शत्रु पर जीत, दयाहीन, सेनापति, दुःशीलयुक्त, राजसी स्वभाव।
दशम में सूर्य मंगल-
चाकरी कर्ता, निष्फल कार्य, प्रधान, राजा का सेवक, नित्य उद्विग्न चित्त।
दशम में सूर्य बुद्ध हाथी, घोड़ा, पृथ्वी का स्वामी, विख्यात्, यदि नीच का हो तो ऐसा नहीं होगा।
दशम में सूर्य गुरु-
नीच कुल में भी जन्म लेकर कीर्ति, सौख्य, सम्मान और धन से युक्त
दशम में सूर्य शुक्र-
राजनीति शास्त्र में चतुर, मित्र, धन, वाहन युक्त, बहुत कार्यों को आरंभ करने वाला।
दशम में सूर्य शनि-
परदेशगामी, चाकरी करने वाला, जो कुछ धन राजा से प्राप्त करता है, उसे किसी समय चोर चुरा ले जाता है।
दशम में चन्द्र मंगल
-हाथी, घोड़ा, खजान, सम्पदा, बुद्धि से युक्त, पराक्रमी।
दशम में चन्द्र बुद्ध-
विख्यात, मानयुक्त, धनी, राजा, मंत्री अवस्था के अन्त भाग में दुखी, बंधु से हीन।
दशम में चन्द्र गुरु-
विद्वान दान कर्ता, मानधर्म कीर्ति से युक्त, समृद्ध, लंबी भुजा, सबके पूजने योग्य,
दशम में चन्द्र शुक्र- विख्यात मंत्री, क्षमागुक्त, धन वैभव से युक्त,
दशम में चन्द्र शनि-
विख्यात, जीते हुए शत्रु वाला, राजा, दो स्त्री,
दशम में मंगल बुद्ध
शूरवीर, बुद्धिमान, तेजस्वी, राज से सत्कार प्राप्त, क्रूर, सेनापति, धौर
दशम में मंगल गुरु- बहुत से परिवार और धन वाला, राजा कीर्तिमान और कर्म समर्थ,
दशम में मंगल शुक्र- शास्त्र विद्या में निपूर्ण, माला, वस्त्र, विद्या, अर्थ बुद्धि से युक्त, राजमंत्री, स्त्री के सनान शरीर।
दशम में मंगल शनि-तेल बेचने वाला, सुवर्णकार, नाच, गाना करने वाला, चित्रकारी या गन्ध से जीविका।
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