Wednesday, July 15, 2026

॥ गृह प्रवेश कर्म ॥

एक कलश में जल लेकर सुवासिनी स्त्रियों को आगे करके मुख्य द्वार पर आकर बैठ जांव।

आचमन करके हाथ में संकल्प लें।

संकल्प

अद्य अस्मिन पुण्याहे अमुक गोत्रः अमुक नामाहं श्रौत स्मार्त कर्म करणार्थ संस्कारानेक भोगैश्वर्यादि विविध मंगलोदय सिद्धवे एतन् नवीनगृह प्रवेशमहं करिष्ये ।

प्रार्थना

ॐ स्थापितेयं मया शाखा शुभदा ऋद्धिदास्तु मे ।

 सुपूजिता मया शाखा सर्वदा सुस्थिरास्तु मे ॥

चौखट पूजन
दायीं, बावी, ऊपरी एवं नीचे चोरो चौखट को प्रणाम करें।
दायी चौखट
यो धारयति सर्वेशो जगन्ति स्थावराणि च।
 धाता दक्षिणशाखायां पूजितो वरदोऽस्तु मे ॥
ॐ धात्रे नमः ॥

वायीं चौखट
यः समुत्पाद्य विश्वेशो भवनानि चतुर्दश ।
 विधाता वाम शाखायां स्थिरो भवति पूजितः ॥
ॐॐॐ विधात्रे नमः ॥

ऊपरी चौखट
गजवक्त्र गणाध्यक्ष हे हेरम्बाम्बिकात्मज ।
विघ्नान्निवारयाशुत्वम्ध्वोदुम्बरसंस्थितः ॥
ॐॐ गणपतये नमः ॥

नीचे चौखट (देहली)
यस्या प्रसादात् सुखिनो देवाः सेन्द्राः सहोरगाः। 
सा वे श्री देहली संस्था पूजिता ऋद्धिदाऽस्तु मे ॥
ॐॐॐ देहिल्यै नमः ।॥

प्रार्थना
तथा पुनः अक्षतपुष्पादि लेकर दोनों हाथ जोड़कर, निम्नांकित प्रार्थना करे।
ॐ धर्मार्थ काम सिद्व्यर्थ पुत्र पौत्राभिवृद्धये। 
त्वामहं प्रविशाम्यच भगो मन्दिर ते नमः ॥
यावत् चन्द्रश्च सूर्यश्च वावत् तिष्ठति मेदिनी ।
 तावत् त्वं मम वंशस्य मङ्गला भ्युदयं कुरु ॥

पुनः देहली को स्पर्श करते हुए प्रणाम करे।
शंखघोष करते हुए यजमान पत्नी बावाँ पैर और यजमान दायां पैर आगे बढ़ाकर
भवन में चारो तरफ घुमते हुए पूर्व सम्पादित वास्तु पूजा मण्डप में प्रवेश करें।
ॐ धर्म स्थूणा राज श्री स्तुप महोरात्रे द्वारफलके इन्द्रस्य गृहा वसुमन्तो वरुधिनस् तामहं प्रपद्ये सह प्रजया पशुभिः सह। 
यन्मे किञ्चिदस् त्युपहतः सर्वगणः सखायः साधु संवृतः। 
तां त्वा शालेऽरिष्ठ वीरा गृहान्न सन्तु सर्वतः ।।

भंडारगृह पूजन
ॐ अस्मिन नूतन गृहे पुण्याहं कल्याणं श्रीरस्तु ॥

स्तम्भ पूजन
ॐ धारणार्थ महाभाग निर्मितो विश्वकर्मणा। 
स्थापितः शुभदो नित्यं गृहभार क्षमो भवत् ॥

चूल्हा पूजन
ॐ महानस इतिख्यातो देव यज्ञादि सिद्धि कृत् । 
अन्नादि साधनं स्थानं धर्ममूलं शुभप्रदम् ॥
ॐ चूल्यां धर्माय नमः ॥

जल स्थान पूजन
ॐ शंख स्फटिक वर्णाभ वेत हाराम्बरावत ।
 पाश हस्त महाबाहो दयां कुरु दयानिधे ॥
ॐॐॐ वरुणाय नमः ॥

चक्की (जांत) पूजन

ॐ सौभाग्वं सुभगे पेषणी संस्थिता सदा। 
पिष्ट निष्पादनार्थ त्वं पूजिता शुभदास्तुमे ॥
ॐ सुभगायै नमः ॥

उलूखल (ओखरी) पूजन
ॐॐॐ ब्रीहीणां कंडनं वच्च तुषाणां च विमोचनम् । 
त्व दधीन मतः पूजां करोमि तव सिद्धये ॥
ॐॐॐ रौद्रपीठाय नमः ॥

मूसल पूजन
ॐ वलभद्र पियाय नमः ॥
सूप पूजन
ॐ किन्नराय नमः ॥

शयन कक्ष पूजन
ॐ कामः कामप्रदो मेस्तु शयनीये सुपूजित । 
पूजां गृहाणभो सुमुख धन धान्य समृद्धये ॥
ॐॐॐ समखाय नमः ॥

पशु स्थान पूजन
ॐ सर्वाधियो महादेव ईशानः शुक्ल शंकरः । 
पशूनां पति रस्माकं पूजितः शुभदः सदा ॥
ॐ पशुपतये नमः ॥

प्रार्थना
ॐ एते सुपूजिता देवाः सन्तु मे सर्वसिद्धिदा। 
नश्यन्तु सर्वविघ्नानि देवानां पूजनादिह ॥
ॐ सर्व देवोभ्यो नमः ॥
छाया दर्शन
वजमान अपने सामने धान्य के उपर
 एक नया घी से भरा कटोरा रखे।
पंचोपचार पूजा कर दे।
घी भरे कटोरे में अपनी परछाई देखें।
ॐ रुपेण वो रुप मभ्या गान् तु थो वो विश्व वेदा विभजतु । ऋतस्य चथा प्रेत चन्द्र दक्षिणा विस्वः पश्य व्यन्तरिक्षं व्यत् तस्व सदस्यैः ॥

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