Thursday, July 23, 2026

१२. शेषनाग कालसर्प योग

द्वादश भाव में राहु तथा षष्टम भाव में केतु तथा अन्य ग्रह इनके मध्य में हो तो शेषनाग कालसर्प योग बनता है।

इस योग वाले को आचानक खर्च, नुकसान, चोरी, डकैती का सामना करना पड़ता है।

 व्यर्थ खर्चे, भ्रमण, कार्यस्थल परिवर्तन या स्थान परिवर्तन बार बार करना पड़ता है। 

१२ वें घर में शुभ ग्रह हो तो जीवन भर संघर्ष करता है तथा मरणोपरान्त प्रसिद्धि प्राप्त होती है।

 शुभ योग से विदेश यात्रा भी प्राप्त होती है परन्तु खर्च अधिक लाभ कम प्राप्त होता है। अपव्यय के कारण आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है।

 राजदण्ड व मुकद्दमों के कारण धन हानि भी होती है। 

१२ वें शुक्र,मङ्गल, शनि हो तो जानवर से चोट या विषैले जानवर द्वारा अथवा कुत्ते के काटने से पीड़ा होवे। 

किसी दवा का कुप्रभाव भी हो सकता है। नेत्रपीड़ा, उदरपीड़ा अथवा स्त्रायु मण्डल में कम्पन व विकार पैदा हो जाता है।

 गुप्त शत्रु होते हैं, पैशाचिक बाधा भी परेशानी दे सकती हैं।

सन्तान घर से यह घर आठवां होता है अतः इस घर में पाप योग हो तो सन्तान सुख में अभाव पैदा करता है।

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