Thursday, July 23, 2026

११. विषाक्त (विषधर) कालसर्प योग

एकादश भाव में राहु तथा पञ्चम भाव में केतु तथा अन्य ग्रह इनके मध्य में हो तो विषाक्त कालसर्प योग होता है। 

इस योग से व्यक्ति की स्मरण शक्ति पर असर पड़ता है, विद्या में बाधा आती है।

 धन तो कमाये परन्तु उसका सदुपयोग नहीं हो पाता है। सन्तान विषय में चिन्ता पीड़ा रहे, सन्तान का भविष्य बनाने में बहुत संघर्ष करना पड़ता है।

 परिवार में सम्बन्ध मधुर नहीं रहे। लाभ के योग बहुत आये परन्तु अल्प लाभ ही प्राप्त हो। त्रुटिपूर्ण निर्णय से जीवन दुःखी हो जाता है।

 सौदा, सट्टा, शेयर्स में धन नहीं लगायें यदि पहले लाभहो भी जाये तो बाद में बर्बाद हो जाता है।

 व्यक्ति के गुप्त सम्बन्ध बनते हैं। स्वभाव चिड़चिडा भी हो जाता है। प्रेतादि बाधा से व्यक्ति ग्रसित भी हो सकता है।

 व्यक्ति धोखे से नुकसान उठाता है। 


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