वाहन सुख के योग -
01. चतुर्थेश बलवान् होने से तथा चतुर्थ शुभ ग्रह से युक्त दृष्ट होने पर वाहन सुख की प्राप्ति होती है।
02. धनेश लग्न में, दशमेश धन भाव में चतुर्थ में उच्च राशिगत ग्रह, इन तीनों योगों में किसी एक के होने पर ही वाहन योग बन जाता है। यदि कुण्डली में तीनों ही योग बन जावें तो अनेक वाहन योग बन जाता है।
03. लग्नेश चतुर्थेश तथा नवमेश के परस्पर केन्द्रगत होने से वाहन सुख की प्राप्ति होती है।
04. 1,4,9 भाव में चतुर्थेश और लग्नेश की स्थिति से अर्थात् दोनों के साथ बैठने से वाहन सुख प्राप्त होता है।
05. चतुर्थेश पंचम में पंचमेशं चतुर्थ में होने से वाहन सुख की प्राप्ति ।
06. चतुर्थेश एकादश में एकादशेश चतुर्थ में स्थित होने पर वाहन सरन मिलता है।
07. चतुर्थेश और दशमेश अन्योन्य राशिगत हो।
08. चतुर्थेश नवमेश अन्योन्य राशिगत है।
09. चतुर्थेश दशमस्थ हो दशमेश लग्नस्थ हो।
10. लग्नेश 9,11 भाव में हो।
11. शुक्र से चन्द्र सप्तम में हो अथवा चतुर्थेश शुक्र के साथ हो अथवा चतुर्थेश शुक्र के साथ चतुर्थ में हो।
12. चतुर्थस्थान में शुभग्रह हो, चतुर्थ भाव शुभयुक्त दृष्ट हो, शुक्र चन्द्र को देखता हो, चन्द्र से तृतीय भाव में शुक्र हो. शुक्र से तृतीय में चन्द्र हो, इन 5 योगों में वाहन सुख प्राप्त होता है।
13. चतुर्थेश केन्द्रगत हो उस केन्द्र का स्वामी लग्न में हो अथवा दशमेश एकादशेश अन्योन्य राशिगत हो
14. चतुर्थेश लग्न में शुक्र के साथ हो
15. पूर्णचन्द्र और शुक्र केन्द्र या त्रिकोण में हो।
16. चतुर्थेश शुभ ग्रहयुक्त दशम में हो।
17. चतुर्थेश 6,8,12 भाव में हो अथवा नीच हो या शत्रुगृही हो उस पर नवमेश की दृष्टि पड़ती हो तो वाहन में बार-बार खराबी होती रहती है।
18. एकादश में चतुर्थेश और नवमेश हो अथवा इन दोनों की दृष्टि चतुर्थ भाव पर पड़ती हो।
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