ग्रहों की अवस्था
ग्रहों के फल देने की क्षमता उसकी अवस्थाओं के अनुसार घटती-बढ़ती हैं। ये अवस्थायें ५ मानी गयी हैं-
(१) बाल्यावस्था (२) कुमारावस्था (३) युवावस्था (४) वृद्धावस्था (५) मृत इसका निर्धारण निम्नप्रकार से किया जाता है-
१. बाल्यावस्था - विषम राशियों में १ से ६ अंश तक स्थित ग्रह बाल्यावस्था में माँना जाता है। समराशि में २५ से ३० अंश तक स्थित ग्रह बाल्यावस्था में होता है।
२. कुमारावस्था - विषम राशियों में ६ से १२ एवं समराशियों में १९ से २४ अंश तक ग्रह के स्थित होने पर उसकी कुमारावस्था मानी जाती है।
३. युवावस्था- विषम एवं सम दोनों प्रकार की राशियों में १३ से १८ अंश तक में स्थित ग्रह युवावस्था में समझा जाता है।
४. वृद्धावस्था - विषम राशि में १९ से २४ एवं समराशि में ७ से १२ अंश
तक में स्थित ग्रह वृद्ध माना जाता है।
५. मृत- विषम राशि में २५ से ३० एवं सम राशि में १ से ६ अंश तक स्थित ग्रह मृत समझा जाता है।
ग्रहों की अवस्था के अनुसार फलप्रभाव निम्नलिखित प्रकार से होता है-
बाल्यावस्था - अल्प; कुमारावस्था - अर्द्ध
युवावस्था - पूर्ण; वृद्धावस्था - अर्द्ध
मृत - प्रभावहीन
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