८. कर्कोटक कालसर्प योग
अष्टम भाव में राहु तथा धन घर में केतु तथा शेष ग्रह इनके मध्य मे हो तो कर्कोटक कालसर्प योग बनता है।
यह योग आयु, स्वास्थ्य, व धन पर प्रभाव डालता है। कभी ऋणी करेगा, तो कभी धनी बनायेगा।
कभी रोगी, कभी निरोगी करे। जीवन में अस्थिरता अधिक रहे। वैसे आठवां शनि एवं आठवां राहु आयु बढ़ाता है, परन्तु अन्य योग देखकर फलित करें।
आठवें राहु के साथ मङ्गल या शनिव्यक्ति को रुग्णता देते हैं। भूतप्रेत बाधा से व्यक्ति पीड़ित रहे तथा भैरव उपासना उसको अधिक अनुकूल रहे।
बात बात पर धन हानि आरोप-प्रत्यारोप रहे। मुकद्दमेबाजी में धन हानि होवे, धोखा होवे, दूसरों को दिया पैसा नहीं आये।
वाणी पर नियन्त्रण कम रहे, शत्रु बढ़े। नौकरी, व्यापार में स्थान परिवर्तन होवे।
यदि कुण्डली में अच्छे योग हो तो विदेश यात्रा करे, धन कमाये, परन्तु वहधन स्थिर नहीं रहेगा।
परिवार में कलह रहे, कुटुम्ब चिन्ता रहे। यदि दूसरे घर में पाप ग्रह हों, सूर्य चन्द्र हो तो पति या पत्नि को कष्ट रहे।
शनि मङ्गल साथ हो या उनमें षडाष्टक योग हो तो दुर्घटना योग भी बनता है। इस जातिका का स्वास्थ्य अधिकांशतः कमजोर रहता है।
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