७. तक्षक कालसर्प योग
सप्तम भाव से लग्न तक राहु-केतु के मध्य ग्रह होने से तक्षक नामक कालसर्प योग बनता है।
यह योग जीवन साथी तथा व्यापारिक साझेदार पर प्रभाव डालता है। व्यापार में साझेदार से धोखा होता है।
विवाह में विलंब होता है, स्त्री से विचार कम मिले, अतः गुप्त प्रेम प्रसंग बढ़ें। प्रेम के क्षेत्र में असफलता मिले।
स्त्रियों के कारण आर्थिक व सामाजिक हानि उठानी पड़े। ऐसे जातक की मित्रता शीघ्र टूटती है, सबको संकोच की दृष्टि से देखता है।
व्यक्ति भावुक भी अधिक होता है। उसकी पैतृक सत्पत्ति नष्ट हो जाती है या दान में दे देता है।
गुप्तरोग व गुप्त शत्रुओं से वेदनाशील रहता है। आरोप-प्रत्यारोप का शिकार होता रहता है। वैवाहिक जीवन कमजोर रहे, स्त्री रोगी रहे।
इस जातक के सूर्य बुध शुक्र मङ्गल शुभ होने से उन्नति रही। राहु ने भाग्येश गुरु का फल दिया इसलिये राहु दशा में उन्नति हुई।
राहु में शनि ही कमजोर रहा। अतः ग्रह देखकर कालसर्प में राहु का फल जानें।
अन्य ग्रह शुभ होने से पति पक्ष में कोई परेशानी नहीं आयी, विवाह भी समय पर हुआ, सन्तान ने भी उन्नति की।
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