Thursday, July 23, 2026

१०. घातक कालसर्प योग

दशम भाव में राहु तथा चतुर्थ भाव में केतु तथा अन्य ग्रह इनके मध्य में हो तो घातक कालसर्प योग बनता है।

 इस योग से माता पिता से सुख सहयोग कम होता है। नौकरी में बार बार आरोप प्रत्यारोप लगते हैं।

 नौकरी छूटे या व्यापार में स्थान परिवर्तन हो। कुछ उन्नति के बाद पुनः हानि हो जाती है। 

उसके सहयोगी उसको गलत सलाह देते हैं। पैतृक सम्पत्ति हेतु वाद-विवाद बनते हैं। 

व्यवसाय में सहयोगी धोखा देते हैं।

 इस योग में यदि सप्तम स्थान में सूर्य, चन्द्र हो बृहस्पति शुक्र की पूर्ण युति हो अथवा बृहस्पति शुक्र में षडाष्टक योग हो या बृहस्पति राहु में षडाष्टक योग हो तो स्त्री सुख में हानि या तलाक हो।


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