Thursday, July 23, 2026

४. शङ्खपाल कालसर्प योग

चतुर्थ भाव में राहु तथा दशम भाव में केतु हो तथा सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य हो अथवा दशवे राहु चौथा केतु हो तो भी शङ्खपाल नामक कालसर्प योग बनता है।

 चतुर्थ भाव सुख, सम्पत्ति, जायदाद, निद्रा, हृदय तथा शयन सुख का एवं माता का होता है। 

यह योग इनमें से किसी एक पक्ष को विशिष्ट हानि देगा। यदि जीवन में अच्छा धन कमा लिया हो तो जीवन के उत्तरार्ध में सब कुछ लुट जायेगा।

 इसके लिये ग्रहों की दशा का अवश्य अवलोकन करें। किसी की जायदाद हानि करे, किसी को गृह कलह, तलाक, पत्नि वियोग देवे तो किसी के माता पिता की शीघ्र मृत्यु होवे।

 दूसरों से धोखा मिलेगा, जातक चिन्ताशील रहे। पति-पत्नि में किसी का चरित्र संदिग्ध हो सकता है।

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