५. पद्मकालसर्प योग
पञ्चम भाव में राहु ११ वें भाव में केतु हो तो यह पद्म नामक कालसर्प योग होता है।
यों तो कहते हैं पाँचवा राहु विदेश विद्या, अंग्रेजी तथा गणित में अच्छा होता है अर्थात् विद्या में सहायक है परन्तु कालसर्प योग बनने पर यह विद्या में अवरोध देता है।
पाँचवे राहु-केतु का सूर्य चन्द्र मङ्गल के साथ योग हो तो विद्या में अवरोध, सन्तान चिन्ता, गर्भपात होवे। ऐसे जातक की वाणी असंयमित रहती है, क्रोधी होता है।
जादू, टोना, अभिचार कर्म से पीड़ित होकर तरह तरह के दुःख प्राप्त करता है।
जातक तन्त्र-मन्त्र, पैशाचिक साधना की ओर अग्रसर हो सकता है जो आगे जाकर उसका भविष्य बिगाड़ देगी।
इस प्रकार के व्यक्ति के मित्र धोखा देने वाले होंगे। पूजा-अनुष्ठान कर्म अक्सर अधूरा रहेगा। मन में उत्साह कम रहेगा।
मङ्गल कार्यों में अधिकांशतः विलम्ब होगा या विघ्न आयेंगे। लड़कियों को सुसराल में परेशानी रहे, बहुयें सेवाभावी नहीं होगी।
व्यक्ति की सोसायटी गलत होगी। गलत खान-पान व नशे की लत होगी। जुआ सट्टे में धन गंवायेगा।
प्रेम के क्षेत्र में धोखा होगा। पञ्चम भाव प्रभावित होने से, पञ्चमेश शून्य अंश का हो तो भी सन्तान की चिन्ता रहे।
बृहस्पति शुक्र की अंशात्मक युति हो या इनमें षडाष्टक योग हो तो स्त्री के गर्भाशय में खराबी, मासिक धर्म बन्द होना या रुकावट आवे।
यदि स्त्री का स्वास्थ्य ठीक हो तो पुरुष के शुक्राणु कमजोर होंगे।
सन्तान सुख में कमी रहती है, सन्तान जीवित कम रहती है, पुत्रियाँ अधिक हो या सन्तान की दिनचर्या ठीक नहीं होवे।
सन्तान के व्यापार, विवाहादि की चिन्ता विशेष रहे।
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