६. महापद्म कालसर्प योग
षष्टम भाव में राहु तथा १२ वें भाव में केतु हो तो यह योग महापद्म कालसर्प योग होता है।
यह योग रोग वे शत्रु की वृद्धि करता है, अन्त में विजय दिलाता है।
वृथा वादविवाद मुकद्दमेबाजी कराता है। चोरी, डकेती, से धन हानि होवे।
आर्थिक परेशानी तथा वृथाभ्रमण एवं वृथा खर्चे रहे। बिमारियाँ परिवार में लम्बी चले।
किसी न किसी की बिमारी पर परिवार में खर्चा होता रहे। व्यापार की अपेक्षा नौकरी ठीक रहे।
नौकरी में भी विवाद चलता रहे, उन्नति समय पर नहीं होवे। प्रत्येक कार्य में रुकावट रहे, क्योंकि यह भाव भाग्य स्थान से दशवां है,
अतः भाग्य को कमजोर करता है।
सन्तान घर से आठवां घर अर्थात् १२ वें घर में केतु सन्तान के लिये कमजोर होता है, अतः सन्तान सुख हेतु केतु का उपाय करें, दो रंग का कुत्ता पालें।
पार्थिव शिव व गणपति की पूजा करें।
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