Thursday, July 23, 2026

२. कुलिक कालसर्प योग


दूसरे भाव में राहु हो तथा केतु अष्टम भाव में हो, शेष सात ग्रह उनके मध्य में हो तो कुलिक नामक कालसर्प योग बनता है। यह जातक धन की तंगी अधिकतर महसूस करेगा, धन के लिये कठिन संघर्ष करना पड़ेगा। ऐसा व्यक्ति रिश्तेदारों से धन का लेन देन नही करें, उनसे सम्बन्ध खराब होंगे।
स्वास्थ्य भी ऐसे व्यक्ति का जल्दी खराब होगा। टोना टोटका, प्रेतदोष उस पर शीघ्र लागू होंगे। व्यापार में अधिक मेहनत करें तो भी नौकरी जितना ही धन प्राप्त होगा।
यदि दूसरे भाव में राहु या केतु हो तथा उनके साथ सूर्य या चन्द्रमा हो तो स्त्री की आयु कम होगी क्योंकि द्वितीय भाव स्त्रीघर से आठवां पत्नि की आयु का घर, है उसमें ग्रहण योग स्त्री की हानि करता है। कुटुम्ब चिंता व धन चिन्ता देता है।
कोई भी कालसर्प योग होवे उस कुण्डली में सूर्य चन्द्रमा एक दूसरे से नवम-पञ्चम होंगे तो जब भी राहु गोचर में सूर्य या चन्द्र पर आयेगाउस समय वह सूर्य चन्द्र दोनों को देखेगा अतः वह समय कष्ट कारक होगा। 

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