दिग्बली ग्रहकृत योग-
लग्न में बुध, गुरु, चतुर्थ में चन्द्र शुक्र, सप्तम में शनि दशम में सूर्य, मंगल दिग्बली होते है यदि 4,5 ग्रह दिग्बली हो तो राजा, 2,3 बली होगा। राजवंशोत्पन्न व्यक्ति राज्याधिकारी पद प्राप्त करता है। वृश्चिक लग्न में सूर्य मेषराशि में चन्द्र और मंगल दशम में होने पर केवल मंगल दिग्बली है, किन्तु यह मंगल सूर्य लग्न का व चन्द्र लग्न का स्वामी हो जाने से तीनों लग्नों का स्वामी होकर दशम में दिग्बली होने कुण्डली का स्तर बहुत ऊँचा जठ गया है। यह योग विशिष्ट व्यक्ति की कुण्डली में उपलब्ध हुआ है।
1. उच्चपदासीन राजयोग यदि लग्नेश केन्द्र में हो और अपने मित्रग्रहों से दृष्ट हो तथा लग्ग में शुभ ग्रह हों तो जातक न्यायाधीश अथवा विधिमंत्री आदि पद प्रारा करता है।
2. यदि पूर्ण चन्द्र जलचर राशि में नवमांश में चतुर्थ भावस्थ हो स्वराशिस्थ शुभग्र लग्न में हो तथा केन्द्र में पापग्रह न हो तो ऐसा जातक राजदूत अथवा गुप्तचर विभाग में किसी उच्चपद को प्राप्त करता है।
3. किस ग्रह की उच्चराशि लग्न में हो, वह ग्रह यदि अपने नवांश अथवा मित्र अथवा उच्च के नवमांश में केन्द्रगत शुभग्रह से दृष्ट हो तो ऐसा जातक शासनधिकारी का पद प्राप्त करता है। यदि केन्द्र मे उच्चराशिस्थ पापग्रह बैठे हो तो ऐसा जातक धनहीन शासक होता है
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