ग्रह एवं राशियों के तत्त्वानुसार बनने वाले योग-
अग्नित्व 1,5,9 राशि में दशम भाव या दशमेश का नवमांश का स्वामी होने पर अग्निसम्बन्धी समस्त कार्य इंजिनियर, इस्पात उद्योग, शल्यचिकित्सा, होटल, विद्युतकार्य, उद्योग, नापित कार्य डाक्टर, कसाई, सानक अन्वेषक, राजनीतिज्ञ ऊजर्जा प्रबन्धक भोज्यपदार्थ निर्माण, धातु का पिघलाना, तलना भूनना आदि में से किसी के माध्यम से आजीविका का जातक कार्य करता है।
भूमितत्व की 2, 6, 10 वी राशि होती है। उपरोका तीनों दशम दशमेश का नवमांश का
स्वामी जन्मलग्न, चन्द्रलग्न, सूर्यलग्न में से जिसका बलवान् हो उसके आधार पर पृथ्वी सम्बन्धी कृषि कार्य, बागवानी भत्रन निर्माण, भूमि विक्रय, भूगर्म सम्पदा, उत्खनन इमारती लड़को का व्यापार वन संरक्षण का कार्य आदि की आजीविका से धनोपार्जन होता है।
वायुतत्व 3, 7, 11 राशि में दशम दशमेश तथा उसका नवमांश का स्वामी बलवान् होने पर जातक दार्शनिक लेखक, विचारक, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, सलाहकार वकील वायुयान चालक वकील, अन्तरिक्षवेत्ता, आदि में से कोई होता है।
जलतत्व, 4, 8, 12 राशि में बलवान ग्रह (उपरोक्त तीनों कुण्डली में दशम, दशमेश तथा नवमांश स्वामी) होने पर जातक दूध मी पेय पदार्थ शर्बत रासायनिक द्रव्य समस्त जल सम्बन्धी कार्य, वस्त्रों की धुलाई, कपड़े या कागज का उत्पादन नौका जहाज रानी जल भण्डारण, समुद्री उत्पादन, सिचाई, नेयजल का निवारण का पेय जल जलकी सफाई मत्स्य (मछली) पालन होटल रेस्तरां आदि से कोई आजीविका कार्य करता है।
वृषराशिस्थ शुक्र दशम भाव में कुशल वादन। उच्च राशिगत चन्द्र दशम में संगीतज्ञ दशमस्थ तुला राशि में बुध और राहु स्थित होने पर इंजिनीयर या वैज्ञानिक। दशमस्थ 3, 7, 11 राशि में चन्द्र बुध का योग कथा साहित्य सृजन, शनि गुरु का योग जज या वकील बनाता है चर्क राशि पर चन्द्र शुक्र या मंगल की दृष्टि होने पर रेस्तरां बेकरी का धन्धा। कर्क राशि पर शनि बुध या गुरु की दृष्टि या युति पुरातत्व विभाग, इतिहास का निपुण शिक्षक होता है।
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