कारकांश से बनने वाले योग-
सूर्य राहु का योग पाप प्रभाव से मुक्त हो तो औषधि विक्रेता वैद्य या डाक्टर विष से पर बनी औषधियों का प्रयोग विशेषतः करते हैं। सूर्य राहु पर मंगल की दृष्टि निष्ठर आततायी दूसरे का घर जलाकर सुख करती है कारकांश में केतुपर शुक्र की दृष्टि से धार्मिक यज्ञ समारोहों में भाग लेने वाला बलि व चढ़ावे से धन प्राप्त करता है। कारकांश पर सूर्य और शुक्र की दृष्टि ने राजदूत या राजा का प्रतिनिधि बनता है। कारकांश में दशमस्थ सूर्य पर गुरु की दृष्टि से पशुपालन पशुरक्षक डेयरी आदि का कार्य करता है। कारकांश से तृतीय या षष्ठ भाव में स्थित पाप ग्रह कृषि या बागवानी के धन्धे से द्रव्यलाभ प्राप्त करता है। काकांश में स्थित चन्द्र शुक्र से दृष्ट होने पर जातक रसायन व औषधि विज्ञान का ज्ञात होता है कारकांश में स्थित चन्द्र पर बुध की दृष्टि होने पर जातक वैद्य, डाक्टर या चिकित्सक होता है, कारकांश में स्थित शनि अथवा कारकांश से नतुर्भ में शनि होने पर अस्त्रशस्त्र के प्रयोग में दक्ष होता हैं, पुलिस या सेना में भर्ती होकर आजीविका प्राप्त करता है केतु कारकांश अथवा कारकांश से चतुर्थ स्थित होन पर घडीसाजी या घड़ी बेचकर धन कमाता है। राहु कारकांश में या इस से चुतुर्थ भाव में स्थित होने पर खान का काम मशीन निर्माण या मशीनों की मरम्मत के काम से धन कमाता है। कारकांश से चतुर्थ भाव में सूर्य या मंगल की स्थिति शस्त्रधारी सुरक्षा कर्मी के रूप में जीविका देती है। कारकांश में पूर्ण चन्द्र गुरु का योग से जातक लेखक सम्पादक या साहित्यकर बनता है शुक्र कारकांश में अथवा कारकांश से पंचमस्थ हो तो सरकार में उच्च पदाधिकारी बनता हैं लग्नेश तथा सप्तमेश से तृतीया भावमें ा छठे भाव में पाप ग्रह की स्थिति सेनापति बनाती है, संक्षिप्त में कारकांश लग्न स्थित सूर्य राजा, राष्ट्रध्यक्ष, मन्त्री सरकार में उच्च पदाधिकारी चन्द्र मन्त्री सचिव विभागाध्यक्ष, मंगल सेनापति वैज्ञानिक आतिशबाजी विस्फोटक रसायन या मशीन परक व्यवसाय। बुध शिल्पी बनाकर, पत्रकार, बकील व्यापारी, गुरु पंडित, पुजारी, नेता, जन नायक सरकारी प्रतिनिधि या राजदूत बनता है।
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