नवम स्थान से व्यवसाय का विचार -
यदि सूर्य नवम भाव में उच्ब मूल त्रिकोण मित्रगृही या अतिमित्रस्थ हो राज्य चिन्ह विक्रय- क्रय, कृषि, नौकरी, कोषाध्यक्ष, डॉक्टरी, वैद्यक चिकित्सक, भ्रमणशील कार्य प्रेस कार्य भाई-भाई का झगड़ा, विवाह कर्म सम्बंधी कार्य आदि से जीविका निर्वाह करता है। नवमें पे चन्द्र उच्च स्वगृही मित्रगृही आदि होतो कृषि वस्त्र व्यापार जल पदार्थ का क्रय विक्रय मैथुन से किसी स्त्री के माध्यम से, ब्राह्मण विरोध से आजीविका चलाता है। मंगल उच्चादि में नवमस्थ होकर बन्धु विवाह वस्त्र मित्र स्वर्ण शत्रु कार्य बल क्षय से आजीविका चलाता है। अस्त्र-शस्त्र विस्फोट पदार्थ अग्नि विद्युत मशीनरी आदि से द्रव्योपार्जन करता है। बुध उच्चादि में स्थित नवम भाव में उच्च में स्थित अध्यापन के कार्य से पंडिताई से धन लाभ, शुभ राशिस्थ किसी स्त्री के वाद-विवाद से मित्र राशिस्थ कृषि से जींदारी से। नीन राशिगत बन्धु विरोध से धन लाभ।
उच्च राशिगत नवम में स्वर्ण, भूमि, राजा से लाभ। स्वगृही से पठन-पाठन लेखन से शिल्पकारी से राजपत्नी के अनुग्रह से वस्त्र स्वर्ण के क्रय विक्रय से धन प्रात करता है। गुरु नवमस्थ उच्चादि में स्थित होने से धनी गुणी प्रतापी सर्व सम्पत्ति सम्पन्न और किसी संस्था का प्रधान होता है अध्यापन व नौकरी से धन दिलाता है। शुक्र उच्चस्थ वा स्वक्षेत्री नवम में राज्य कार्यकर्त्ता मन्त्री शिक्षा विभागाधिकारी, सेनापति, अध्यापक, कृषक यज्ञकार्य आदि से लाभ प्राप्तकर्त्ता तथा स्त्री पुत्र भ्राता आदि से सुखी होता है, और वापी कूप तडागादि का निर्माता करवाता है। यदि शुत्रगृही हो तो पातकी बुद्धिहीन व दरिद्री होता है। स्त्री के लिये लालायित रहता है।
शनि- मंगल जैसा कार्यकर्ता होता है और वैसा ही कर्म भी करता है।
एकादश से व्यवसाय विचार-
यदि लाभेश सूर्य या चन्द्र हो तो राज्याश्रित जीवन यापन करने से, मंगल लाभेश हो तो राजमन्त्री कृषि भाता से, बुध लाभेश हो तो विद्या या पुत्र से गुरु लाभेश हो तो धर्म कार्य से शुक्र लाभेश स्त्री से, वाहन से रत्नादि से द्रव्य प्राप्त होता है। शनि लाभेश हो तो नीचकर्म से नौकरी से श्रम्कि वर्ग से धन लाभ देता है।
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