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ज्योतिष उपकरण

Astro Tools — वैदिक ज्योतिष संदर्भ

दिन का चौघड़िया
समय Su Mo Tu We Th Fr Sa
6–7:30 उद्वेग अमृत रोग लाभ शुभ चर काल
7:30–9 चर काल उद्वेग अमृत रोग लाभ शुभ
9–10:30 लाभ शुभ चर काल उद्वेग अमृत रोग
10:30–12 अमृत रोग लाभ शुभ चर काल उद्वेग
12–1:30 काल उद्वेग अमृत रोग लाभ शुभ चर
1:30–3 शुभ चर काल उद्वेग अमृत रोग लाभ
3–4:30 रोग लाभ शुभ चर काल उद्वेग अमृत
4:30–6 उद्वेग अमृत रोग लाभ शुभ चर काल
रात का चौघड़िया
समय Su Mo Tu We Th Fr Sa
6–7:30 शुभ चर काल उद्वेग अमृत रोग लाभ
7:30–9 अमृत रोग लाभ शुभ चर काल उद्वेग
9–10:30 चर काल उद्वेग अमृत रोग लाभ शुभ
10:30–12 रोग लाभ शुभ चर काल उद्वेग अमृत
12–1:30 काल उद्वेग अमृत रोग लाभ शुभ चर
1:30–3 लाभ शुभ चर काल उद्वेग अमृत रोग
3–4:30 उद्वेग अमृत रोग लाभ शुभ चर काल
4:30–6 शुभ चर काल उद्वेग अमृत रोग लाभ
राशि — नामाक्षर, नक्षत्र एवं पाद
क्रम राशि नामाक्षर स्वामी तत्त्व स्वभाव नक्षत्र एवं पाद
1मेषचू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अमंगलअग्निचरअश्विनी 4, भरणी 4, कृत्तिका 1
2वृषभई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वोशुक्रपृथ्वीस्थिरकृत्तिका 3, रोहिणी 4, मृगशिरा 2
3मिथुनका, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हाबुधवायुद्विस्वभावमृगशिरा 2, आर्द्रा 4, पुनर्वसु 3
4कर्कही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डोचन्द्रजलचरपुनर्वसु 1, पुष्य 4, आश्लेषा 4
5सिंहमा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टेसूर्यअग्निस्थिरमघा 4, पूर्वाफाल्गुनी 4, उत्तराफाल्गुनी 1
6कन्याटो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पोबुधपृथ्वीद्विस्वभावउत्तराफाल्गुनी 3, हस्त 4, चित्रा 2
7तुलारा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, तेशुक्रवायुचरचित्रा 2, स्वाती 4, विशाखा 3
8वृश्चिकतो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यूमंगलजलस्थिरविशाखा 1, अनुराधा 4, ज्येष्ठा 4
9धनुये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भेगुरुअग्निद्विस्वभावमूल 4, पूर्वाषाढ़ा 4, उत्तराषाढ़ा 1
10मकरभो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गीशनिपृथ्वीचरउत्तराषाढ़ा 3, श्रवण 4, धनिष्ठा 2
11कुम्भगू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दाशनिवायुस्थिरधनिष्ठा 2, शतभिषा 4, पूर्वाभाद्रपद 3
12मीनदी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, चीगुरुजलद्विस्वभावपूर्वाभाद्रपद 1, उत्तराभाद्रपद 4, रेवती 4
ग्रह परिचय
ग्रह स्वामी राशि मुख्य कारकत्व प्रकृति
सूर्यसिंहआत्मा, पिता, राज्य, प्रतिष्ठाक्रूर
चन्द्रकर्कमन, माता, भावनाएँसौम्य
मंगलमेष, वृश्चिकसाहस, भूमि, भाई, शक्तिक्रूर
बुधमिथुन, कन्याबुद्धि, वाणी, व्यापारसौम्य
गुरुधनु, मीनज्ञान, धर्म, संतान, गुरुसौम्य
शुक्रवृषभ, तुलाविवाह, कला, सुख, वाहनसौम्य
शनिमकर, कुम्भकर्म, आयु, श्रम, विलम्बक्रूर
राहुमाया, विदेशी विषय, भौतिकताक्रूर
केतुमोक्ष, वैराग्य, अध्यात्मक्रूर
ग्रह गोचर — महादशा — मंत्र
नवग्रहों के सामान्य गोचर की अवधि, विम्शोत्तरी महादशा की अवधि तथा ग्रह मंत्र का संदर्भ डेटा। गोचर की वास्तविक प्रवेश/निर्गमन तिथि और समय ग्रह की वास्तविक गति के अनुसार बदलते हैं।
ग्रह सामान्य गोचर अवधि महादशा वार मंत्र
सूर्य लगभग 30 दिन 6 वर्ष रविवार ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
चन्द्र लगभग 2¼ दिन 10 वर्ष सोमवार ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः
मंगल लगभग 45 दिन 7 वर्ष मंगलवार ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
राहु लगभग 18 माह 18 वर्ष शनिवार ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
गुरु लगभग 12–13 माह 16 वर्ष गुरुवार ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
शनि लगभग 2½ वर्ष 19 वर्ष शनिवार ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
बुध लगभग 14–30 दिन 17 वर्ष बुधवार ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
केतु लगभग 18 माह 7 वर्ष मंगलवार ॐ स्रां श्रीं स्रौं सः केतवे नमः
शुक्र लगभग 23–30 दिन 20 वर्ष शुक्रवार ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

विम्शोत्तरी महादशा क्रम

सूर्य → चन्द्र → मंगल → राहु → गुरु → शनि → बुध → केतु → शुक्र
कुल अवधि: 120 वर्ष
ग्रह महादशा प्रमुख जप मंत्र सामान्य जप संख्या
सूर्य6 वर्षॐ सूर्याय नमः7,000
चन्द्र10 वर्षॐ चन्द्राय नमः11,000
मंगल7 वर्षॐ भौमाय नमः10,000
राहु18 वर्षॐ राहवे नमः18,000
गुरु16 वर्षॐ गुरवे नमः19,000
शनि19 वर्षॐ शनैश्चराय नमः23,000
बुध17 वर्षॐ बुधाय नमः9,000
केतु7 वर्षॐ केतवे नमः17,000
शुक्र20 वर्षॐ शुक्राय नमः16,000

अंतरदशा अवधि का नियम

किसी भी महादशा के भीतर अंतरदशा की अवधि = महादशा वर्ष × अंतरदशा ग्रह के वर्ष ÷ 120। इसी नियम से प्रत्येक महादशा में सभी 9 ग्रहों की अंतरदशा अवधि निकाली जाती है।
ग्रह उच्च — नीच — मूलत्रिकोण — स्वक्षेत्र
ग्रह उच्च राशि उच्च अंश नीच राशि नीच अंश मूलत्रिकोण स्वक्षेत्र
सूर्यमेष10°तुला10°सिंहसिंह
चन्द्रवृषभवृश्चिककर्क
मंगलमकर28°कर्क28°मेषमेष, वृश्चिक
बुधकन्या15°मीन15°कन्यामिथुन, कन्या
गुरुकर्कमकरधनुधनु, मीन
शुक्रमीन27°कन्या27°तुलावृषभ, तुला
शनितुला20°मेष20°कुम्भमकर, कुम्भ
ग्रह दृष्टि
ग्रह सामान्य दृष्टि विशेष दृष्टि
सूर्य7वीं
चन्द्र7वीं
मंगल7वीं4वीं, 8वीं
बुध7वीं
गुरु7वीं5वीं, 9वीं
शुक्र7वीं
शनि7वीं3वीं, 10वीं
राहु7वीं5वीं, 9वीं
केतु7वीं5वीं, 9वीं
पञ्चधा मैत्री
स्थिति निर्माण अर्थ फल
अधिमित्रनैसर्गिक मित्र + तात्कालिक मित्रअत्यन्त मित्रअति शुभ
मित्रनैसर्गिक सम + तात्कालिक मित्रमित्रशुभ
सममित्र + शत्रुसममध्यम
शत्रुसम + शत्रुशत्रुअशुभ
अधिशत्रुनैसर्गिक शत्रु + तात्कालिक शत्रुघोर शत्रुअत्यन्त अशुभ
ग्रह मित्र सम शत्रु
सूर्यचन्द्र, मंगल, गुरुबुधशुक्र, शनि
चन्द्रसूर्य, बुधमंगल, गुरु, शुक्र, शनिकोई नहीं
मंगलसूर्य, चन्द्र, गुरुशुक्र, शनिबुध
बुधसूर्य, शुक्रमंगल, गुरु, शनिचन्द्र
गुरुसूर्य, चन्द्र, मंगलशनिबुध, शुक्र
शुक्रबुध, शनिगुरुसूर्य, चन्द्र, मंगल
शनिबुध, शुक्रगुरुसूर्य, चन्द्र, मंगल
ग्रह बल — षड्बल
बल अर्थ
स्थान बलग्रह की स्थिति से प्राप्त बल
दिग्बलदिशा एवं भाव से प्राप्त बल
कालबलसमय से प्राप्त बल
चेष्टाबलग्रह की गति से संबंधित बल
नैसर्गिक बलग्रह का स्वाभाविक बल
दृष्टिबलअन्य ग्रहों की दृष्टि से प्राप्त बल
ग्रह अवस्था — अंश एवं सम-विषम राशि
अवस्था विषम राशि सम राशि फल
बाल0°–6°24°–30°कम विकसित शक्ति
कुमार6°–12°18°–24°विकासशील शक्ति
युवा12°–18°12°–18°पूर्ण शक्ति
वृद्ध18°–24°6°–12°घटती शक्ति
मृत24°–30°0°–6°बहुत कमजोर
विषम राशियाँ मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुम्भ
सम राशियाँ वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन
उदाहरण मेष में 4° का ग्रह बाल अवस्था में माना जाएगा।
27 नक्षत्र "आर्द्रादिदशकं रूपं विशाखादि युगलोहकम्। पूर्वादि सप्तताम्रश्च रेवती षष्ठ स्वर्णकम्॥" या राशि/भाव के अनुसार पाया का श्लोक लग्नेन्दोः प्रथमषष्ठैकादशस्थे सुवर्णपादः। द्वितीयपञ्चमनवमस्थे रजतपादः। तृतीयसप्तमदशमस्थे ताम्रपादः। चतुर्थाष्टमद्वादशस्थे लौहपादः॥
क्रम नक्षत्र स्वामी देवता गण योनि नाड़ी पाय
1अश्विनीकेतुअश्विनी कुमारदेवघोड़ाआदिस्वर्ण
2भरणीशुक्रयममनुष्यहाथीमध्यस्वर्ण
3कृत्तिकासूर्यअग्निराक्षसबकरीअन्त्यस्वर्ण
4रोहिणीचन्द्रप्रजापतिमनुष्यसर्पअन्त्यरजत
5मृगशिरामंगलसोमदेवसर्पमध्यरजत
6आर्द्राराहुरुद्रमनुष्यश्वानआदिरजत
7पुनर्वसुगुरुअदितिदेवबिल्लीआदिरजत
8पुष्यशनिबृहस्पतिदेवबकरीमध्यरजत
9आश्लेषाबुधनागराक्षसबिल्लीअन्त्यरजत
10मघाकेतुपितरराक्षसचूहाअन्त्यरजत
11पूर्वाफाल्गुनीशुक्रभगमनुष्यचूहामध्यरजत
12उत्तराफाल्गुनीसूर्यअर्यमामनुष्यगायआदिरजत
13हस्तचन्द्रसवितादेवभैंसआदिरजत
14चित्रामंगलत्वष्टाराक्षसबाघमध्यरजत
15स्वातीराहुवायुदेवभैंसअन्त्यरजत
16विशाखागुरुइन्द्र-अग्निराक्षसबाघअन्त्यरजत
17अनुराधाशनिमित्रदेवहिरणमध्यरजत
18ज्येष्ठाबुधइन्द्रराक्षसहिरणआदिताम्र
19मूलकेतुनिरृतिराक्षसश्वानआदिताम्र
20पूर्वाषाढ़ाशुक्रआपःमनुष्यवानरमध्यताम्र
21उत्तराषाढ़ासूर्यविश्वेदेवमनुष्यनेवलाअन्त्यताम्र
22श्रवणचन्द्रविष्णुदेववानरअन्त्यताम्र
23धनिष्ठामंगलवसुराक्षससिंहमध्यताम्र
24शतभिषाराहुवरुणराक्षसघोड़ाआदिताम्र
25पूर्वाभाद्रपदगुरुअजैकपादमनुष्यसिंहआदिताम्र
26उत्तराभाद्रपदशनिअहिर्बुध्न्यमनुष्यगायमध्यताम्र
27रेवतीबुधपूषादेवहाथीअन्त्यलोह
नक्षत्र — अन्धलोचन, मन्दलोचन, मध्यलोचन एवं सुलोचन
खोई या चोरी गई वस्तु के गुम होने के समय चल रहे नक्षत्र के आधार पर प्राप्ति की संभावना।
लोचन नक्षत्र वस्तु की प्राप्ति दिशा / संकेत
अन्धलोचन पुष्य, उत्तराफाल्गुनी, विशाखा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, रेवती, रोहिणी स्वतः अथवा अल्प प्रयास में प्राप्त अच्छी संभावना
मन्दलोचन आश्लेषा, हस्त, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, शतभिषा, अश्विनी, मृगशिरा बहुत प्रयास करने पर कठिनता से प्राप्त उत्तर या दक्षिण
मध्यलोचन मघा, चित्रा, ज्येष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, भरणी, आर्द्रा अत्यन्त विलम्ब से प्राप्त विलम्ब
सुलोचन पूर्वाफाल्गुनी, स्वाती, मूल, श्रवण, उत्तराभाद्रपद, कृत्तिका, पुनर्वसु प्राप्ति की संभावना नहीं अत्यन्त कठिन
तिथि एवं संज्ञा
क्रम तिथि संज्ञा
1प्रतिपदानन्दा
2द्वितीयाभद्रा
3तृतीयाजया
4चतुर्थीरिक्ता
5पञ्चमीपूर्णा
6षष्ठीनन्दा
7सप्तमीभद्रा
8अष्टमीजया
9नवमीरिक्ता
10दशमीपूर्णा
11एकादशीनन्दा
12द्वादशीभद्रा
13त्रयोदशीजया
14चतुर्दशीरिक्ता
15पूर्णिमापूर्णा
30अमावस्यापूर्णा
27 योग
क्रम योग क्रम योग
1विष्कम्भ15वज्र
2प्रीति16सिद्धि
3आयुष्मान17व्यतीपात
4सौभाग्य18वरीयान
5शोभन19परिघ
6अतिगण्ड20शिव
7सुकर्मा21सिद्ध
8धृति22साध्य
9शूल23शुभ
10गण्ड24शुक्ल
11वृद्धि25ब्रह्म
12ध्रुव26इन्द्र
13व्याघात27वैधृति
14हर्षण
करण
प्रकार करण विवरण
चर बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि आवर्ती करण
स्थिर शकुनि, चतुष्पद, नाग स्थिर करण
विशेष किंस्तुघ्न विशेष करण
पञ्चक
नक्षत्र स्थिति
धनिष्ठापञ्चक प्रारम्भ
शतभिषापञ्चक
पूर्वाभाद्रपदपञ्चक
उत्तराभाद्रपदपञ्चक
रेवतीपञ्चक समाप्त
गण्डमूल नक्षत्र
नक्षत्र राशि
अश्विनीमेष
आश्लेषाकर्क
मघासिंह
ज्येष्ठावृश्चिक
मूलधनु
रेवतीमीन
संक्रांति
क्रम संक्रांति सूर्य प्रवेश राशि
1मेष संक्रांतिमेष
2वृषभ संक्रांतिवृषभ
3मिथुन संक्रांतिमिथुन
4कर्क संक्रांतिकर्क
5सिंह संक्रांतिसिंह
6कन्या संक्रांतिकन्या
7तुला संक्रांतितुला
8वृश्चिक संक्रांतिवृश्चिक
9धनु संक्रांतिधनु
10मकर संक्रांतिमकर
11कुम्भ संक्रांतिकुम्भ
12मीन संक्रांतिमीन

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