वृषलग्नान्तर भौम फलम्
वृष का मंगल लग्न के पहिले स्थानमें हो तो वह मनुष्य देह में कुछ कम-जोरी व रक्त विकार पाने वाला और दैनिक रोजगार की लाइन से खर्च की शक्ति प्राप्त करने वाला और स्त्री स्थान को बहुत महत्त्व देनेत्राला किन्तु स्त्री के संबंध में कुछ कमी का योग्र पाने वाला और माता के स्थान में कुछ हानि पाने वाला और मकान भूमि आदि के सख में कुछ कमी पाने वाला और अन्य स्थानों के संबंध में रहने तथा घूमने वाला और अन्य स्थानों के संबध से देह ने द्वारा रोजगार की शक्ति पाने वाला और पुरातत्त्व के स्थान में कुछ अच्छाई बराई का मिश्रित योग पाने वाला और लौकिक कार्यों में बड़ी भारी दौड़ धूप करने वाला कुछ अंशांत होता है।
मिथुन का मंगल लग्न से दूसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य धन स्थान में कुछ हःनियां पाने वाला और अन्य स्थानों के संम्पर्क से रोजगार के द्वारा कुछधन प्राप्त करने वाला और कुटुम्ब स्थान में कुछ हानि पाने वाला और स्त्री स्थान के संबंध में कुछ बंधन व कुछ कंमी पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक की कुछ कमी पाने वाला और संतान पक्ष में कुछ हानि पाने वाला और विद्या स्थान में भी कुछ कमी पाने वाला और भाग्य स्थान में कुछ अन्यम्थान के सबंध से वृद्धि को योग पाने वाला और दैनिक कर्म की शक्ति से धर्म स्थान का कुछ विशेष पालन करने वाला और खर्च के संबंध में खर्च को रोकने पर भी कभी २ विशेष खर्च करने वाला होता है।
कर्क का मंगल लग्न से तीसरे स्थान में हो तो वह मनाय स्त्री पक्ष में हानि व कष्ट अनुभव करने वाला और भाई के पक्ष में त्रियोग पाते वाला और कुछपरतंत्रता युक्त परिवन की शक्ति से खर्च की शक्ति पाने वाला और रोजगार की लाइन में कुछ कमजोरी व कुछ परेशानी का योग पाने वाला और गृहस्थी की परिस्थिनि का दैनिक संचालन मार्ग में बड़ी कठिनाइयां सहकर कार्य करने वाला और गृहस्थ व रोजगार की लाइन के दायरे से भाग्य-वान् समझा जाने वाला और अपनी उन्नति प्राप्त करने के लिये अधिक परिश्रय करने वाला और नत्र स्थान में प्रभाव जमाने के लिये बराबर प्रयत्न शील रहने वाला होता हे।
सिंह का मंगल लग्न मे चौथे स्थान में हो तो वह मनुष्य माता के स्थान में हनि पाने वाला और जन्मभूमि का त्रियोग पाने वाला और रोजगार की दैनिक लाइन में अन्य स्थान के सम्पर्कम लाभ सुख उठाने वाला और अपने निज के स्थान में स्वतंत्र रोजगार के अन्दर कुछ हानि पाने वाला और स्त्री के पक्ष में एक मजबूत सुख और कुछ कमी का योग पाने वाला और खूब मेहनत के कार्य को सुख पूर्वक करने वाला और आमदनी की वृद्धि करने के लिए विशेष प्रयत्न करने वाला और इन्द्रिय भोगा-दिक के स्थान में कुछ कमी के साथ २ वृद्धि पाने वाला तथा राज समाज में कुछ मान पाने वाला होता है।
कन्या का मंगल लग्न से पांचवें स्थान में हो तो वह मन्ष्य ब्रद्धि के स्थान मे अन्य बाहरी शक्तिं-संबंध द्वारा दैनिक रोजगार की शक्ति प्राप्त करने वाला और बहुत ज्यादा खर्च करने वाला तथा विद्या के स्थान में कुछ कमजोरी पाने वाला व संतान पक्ष में कुछ हानि पाने वाला एवं रोजगार. की लाइन में वृद्धि के बड़े घुमाव फिराव न हेर फेर से काम लेने वाला और दूसरों को बातों के चन्नक्कर में डाल, देनेवाला और स्वयं भी दिमाग के अन्दर चक्कर खाने वाले विचारों से काम लेने वाला और पुरातत्त्व के स्थान में कुछ कमजोर शक्ति पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक की शक्ति का व लौकिक कार्यों का चिन्तन करने वाला होता है ।
तुला का मंगल लग्न से छठे स्थान में हो तो वह मनुष्य शोजगार की लाइन में परेशानी व कम-जोरियों का योग पाने वाला व अन्य स्थान के सम्पर्कों के काम चलाने वाला और खर्च के मार्ग में कुछ रुकावटें व कुछ परतंत्रता के साथ प्रभाव पूर्ण खर्च करने वाला और स्त्री स्थान में कुछ परेशानी पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक की कुछ कमी द्वारा प्रभाव से दैनिक बोजगार का पाने वाला तथा भाग्य के स्थान में प्रभाव शक्ति का योग पाने वाला तथा देह के स्थान में कमजोरी व प्रमेह आदि की शिकायत पाने वाला और शत्रु स्थान में प्रभाव रखने वाला वथा ननसाल पक्ष में कुछ हानि पाने वाला होता है।
वृश्चिक का मंगल लग्न से सातवें स्थान में हो तो वह मनुष्य अन्य स्थानों के संबंधों से दैनिकं रोजगार की मज-बूती पाने 'वाला और रोजगार की शक्ति से खर्च संबंधी गृहस्थी में गौरब पाने वाला और गृहस्थी के गौरव के अन्दर कुछ कमजोरी पाने वाला तथा स्त्री स्थान में मजवती वं दृढ़ता के साथ २ कुछ कमी महसूस करने वाला और भोगेन्द्रियों की मजबूती व दृढ़ साधनाओं से भी कुछ कमजोरी पाने वाला तथा पिता के स्थान में कुछ वैमनस्यता व कुछ हानि का योग पानेवाला और देह के अन्दर कुछ कमजोरी पाने वाला और धन स्थान में कुछ हानि पाने वाला और विशेष उन्नति की प्राप्ति के लिये राज समाज में बहुत काम करने वाला होता है।
धन का मंगल लग्न से आठवें स्थान में हो तो वह मनुष्य विदेश आदि अन्य स्थानों के योग से दैनिक रोजगार करने वाला और रोजगार की लाइन में परिश्रम कमजोरी व पुरातत्त्व से संबंधित गुढ युक्तिया क द्वारा कार्य करने वालाऔर रोजगार के संबध मार्ग में बड़ी कठिनाइयां व परेशानियां सहने वाला और स्त्री स्थान में वड़ी हानि पाने वाला और गृहस्थी के सबध म बड़ी मुश्किले सहने वाला और खर्च स्थान म कमजोरी पान वाला और बहन भाइयों के स्थान में हानि पाने वाला और लाभ स्थान की वृद्धि करने के लिये बहुत प्रयत्न करने वाला तथा नाभी के नीचे पेट के अन्दर कुछ शिकायत पाने वाला और पूर्व संचित धरोहर की कुछ हानि पाने वाला औरं कुछ इन्द्रिय विकार पाने वाला कुछ न्यून आयु वाला होता ह ।
मकर का मगल लग्नं से नवम स्थान में हो तो वह मनुष्य अपने भाग्य की शक्ति बल से व दैनिक रोजगार की' लाइन से बहुत खर्च को शक्ति प्राप्त करने वाला और अन्य स्थानों के संबंध से व दैनिक कर्म योग से भाग्यवान् समझा जाने वाला तथा अन्य स्थानों के सबंधित धर्म का पालन करने वाला और यथार्थ धर्म के संबंध में कुछ हानि पाने वाला और बहन भाइयों के स्थान में कुछ कमी व लापरवाही का योग पाने वाला और माताके स्थान में कुछहानि पाने वाला और मकान भूमि आदि के सुख स्थान मं कुछ हानि पाने वाला और भाग्य के अंदरूनी हिस्से में, कुछ कमी महसूस करने नाला और स्त्री संबन्ध का प्रभाव पाने वाला और लौकिक कार्यों में कुछ विशेष कला रखने वाला तथा पुरुषार्थ स्थान में कुछ कमजोरी पाने वाला होता है।
कुम्भ का मंगल लग्न से दसवें स्थान में हो तो वह मनुष्य अन्य स्थानों के सम्पर्क से दैनिक रोजगार को कुछ बड़ ढंग से करने वाला और देह के अन्दर कुछ कम जोरी व खराबी पाने वाला और सतान पथ में कुछ हानि का योग पाने वाला ९ तथा विद्या स्थान में कुछ कमी व कुछ हानि का योग पाने वाला तथा राज समाज के स्थान सबध में कुछ दौड़ धूप करने से मान पाने वाला तथा स्त्री पक्ष में. कुछ कमी के साथ कुछ बड़प्पन का योग पाने वाला तथा मातृस्थान में कुछ कमी का योग पाने वाला और इन्द्रिय संबंधी भांगादिक के कारण से कुछ महानता के साथ २ कमी और अशांति का योग पाने वाला होता है ।
मीन का मंगल लग्न से ग्यारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य दैनिक रोजगार की लाईन से व अन्य स्थान के सम्पर्क से धन कमाने वाला और धन सग्रह के स्थान में कुछ हानि पाने वाला तथा संतान पक्ष में भी कुछ हानि पाने वाला और विद्या में कुछ कमी तथां चतुराई सेकुछ वृद्धि पाने वाला और शत्रु में प्रभाव रखने वाला और ननसाल पक्ष में कुछ हानि पाने वाला तथा स्त्रीस्थान का लाभ पाने वाला किन्तु स्त्री स्थान में व भोगादिक पक्ष मं कुछ कमी व कुछ अन्य स्थान के सबंध से खर्च शक्ति के द्वारा कुछ लाभ पाने वाला और कुटुम्ब स्थान में कुछ हानि पाने वाला और खर्च को कुछ रोकने वाला तथा खूब खर्च भी करने वाला होता है ।
मेष का मंगल लग्न से बारहवें स्थान म हो तो वह मनुष्य स्त्री स्थान स कुछ हानि पाने वाला तथा अन्य स्थान के सबंध से कुछ भोगादिक शक्ति प्राप्तकरने वाला और वहन भाइयों के स्थान मं कुछ कमी व लापरवाही रखने वाला और स्खेजगार की लाइन में कुछ अन्य ९ स्थानों क सबध स तरक्की करने वाला और अधिक खर्च करने वाला और भोगेन्द्रियों क संबंधकी कुछ कमजोशी पाने वाला और स्त्री के संबंध में कुछ प्रेम सम्पर्क को कमी के साथ मजबूत संबंध का योग पान वाला और स्थानीय राज-गार में कुछ कमजोषी होने के कारणों से अपनी हिम्मत व बल पुरुषार्थ को शक्ति के कुछ कमजोरी पाने वाला तथा रोजगार की लाइन में बड़ी दौड़ धूप की ताकत से काम लेने वाला होता है।
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