Wednesday, July 1, 2026

मंगलीक कुण्डली किसे कहते हैं।

 चुनरी मंगल और मौलियां मंगल क्या होता है?

सर्वार्थ चिन्तामणि, चमत्कार चिन्तामणि, देवकेरलम्, अगस्त्य संहिता, भावदीपिका जैसे अनेक ज्योतिष ग्रन्थों में मंगल के बारे में एक प्रशस्त श्लोक मिलता है-

लग्ने व्यये च पाताले, जामित्रे चाष्टमे कुजे। 

भार्याभर्तृविनाशाय, भर्तुश्च स्वीविनाशनम् ।।

अर्थात् जन्म कुण्डली के लग्न स्थान से

 1/4/7/8/12 वें स्थान में 

मंगल हो तो ऐसो कुण्डली मंगलीक कहलाती है।

पुरुष जातक को कुण्डली में यह स्थिति हो तो वह कुण्डली 'मौलिया मंगल' वाली कुण्डली कहलाती है ।

स्त्री जातक की कुण्डली में उपरोक्त ग्रह-स्थिति को  'चुनरी मंगल' वाली कुण्डली कहते हैं।

 इस श्लोक के अनुसार जिस पुरुष की कुण्डली में 'मौलिया मंगल' हो उसे 'चुनरी मंगल' वाली स्त्री के साथ विवाह करना चाहिए अन्यथा पति या पत्नी दोनों में से एक की मृत्यु हो जाती है। यह श्लोक कुछ अतिश्योक्तिपूर्ण लगता है परन्तु कई बार इसकी अकाट्य सत्यता नव दम्पत्ति के वैवाहिक जीवन पर अमिट बदनुमा दाग लगाकर छोड़ जाती है। उस समय हमारे पास पश्चाताप के सिवा हमारे पास कुछ नहीं रहता। ज्योतिष सूचनाओं व सम्भावनाओं का शास्त्र है। इसका सही समय पर जो उपयोग कर लेता है वह धन्य हो जाता है और सोचता है वह सोचता ही रह जाता है, उस समय सिवाय पछतावे के कुछ शेष नहीं रहता।

No comments:

Post a Comment