वृषलग्नान्तरसूर्यफलम्
वृष का सूर्य लग्न के पहिले स्थानमें हो तो वह मनुष्य माता की सहायक शक्ति को कुछ वैमनस्यता से प्राप्तकरने वाला और कुछ वैमनस्यता केद्वारा ही देह का सुख सम्बन्धी साधन प्राप्त करने वाला व अपनी देह में शीतल आग अर्थात् शांत गर्मी रखने वाला और कुछ भूमि का लाभ पाने वाला तथा घरेलू साधनों की शक्ति से दैनिक रोजगार के मार्ग में खूब तरक्की व सुख प्राप्त करने वाला और स्त्री के स्थान से सुख सम्बन्धी प्रभाव पाने वाला तथा गृहस्थ के वातावरण में सुख का अनुभव करने वाला और इन्द्रिय भोगादिक का सुख प्राप्त करने में सहायता पाने वाला तथा देह में कुछ अलकसाहट व प्रभाव का योग पाने वाला होता है।
मिथुन का सूर्य लग्न से दूसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य घन के स्थानसंबंध से सुख उठाने व मानने वाला तथा सुख संबंधी कारणों में कुछबंधन पाने वाला और जायदाद की व जमीन की शक्ति का प्रभाव पाने वाला और माता के संबंध में भी कुछ बंधन योग पाने वाला तथा सुख प्राप्ति के संबंध में बहुत सी वस्तुयें तथा बहुत से पदार्थ संग्रह करके प्रभाव शक्ति पाने वाला और कुटुम्ब के अन्दर घरेलू सुख का प्रताप पाने वाला और मकानादि से व सुख के दिखावटी प्रभाव से धन की शक्ति का योग प्राप्त करने वाला और जीवन की दिनचर्या में व आयु स्थान में सुख प्राप्त करने वाला और पुरातत्त्व स्थान से सुख प्राप्त करने वाला होता है।
कर्क का सूर्य लग्न से तीसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य अपने पराक्रम से बहुत सुख शक्ति प्राप्त करने वाला और बहन तथा भाई का प्रभावशाली सुखप्र.प्त करने वाला और मकान जायदाद की शक्ति प्राप्त करने वाला और शांति यक्त प्रभावशाली मेहनत से प्रभाव पाने वाला और माता की व मातस्थान की शक्ति का सहारा प्राप्त करने वाला और अपने कद के अन्दर सुन्दर प्रभाव व ऊँचाव पाने वाला और धर्म स्थान के संबंध में कुछनीर-सता का योग पाने वाला और भाग्य की शक्ति को कुछकम महत्त्व देने वाला और बहुत उत्साह व उमंग का योग पाने वाला होता है।
सिंह का सूर्य लग्न से चौथे स्थान में हो तो वह मनुष्य बहुत जमीन जायदाद पाने वाला माता की बड़ी प्रभाव शक्ति का सुख उठाने वाला और मातृस्थान से महान् प्रभाव पाने वाला और सुख संबंधी मामलों में बड़ा गौरव और चमत्कार की शक्ति रखने वाला औरभूमि स्थान में विशेष संबंध व स्थानाधिकार होने के कारण से सुख की वृद्धि का योग पाने वाला और पिता स्थान में कुछ विरोध व वैमनस्यता का योग पाने वाला और अधिक मेहनत से होने वालै कर्म में अरुचि रखने वाला और राज व समाज के संबंध में थोड़ा सम्पर्क रखने वाला तथा अपने स्थान में ही मस्ती मानने वाला होता है।
कन्या का सूर्य लग्न से पांचवें स्थान में हो तो वह मनुष्य विद्या ग्रहण करने बाला तथा विद्यास्थान से सुख प्राप्त करने वाला और बुद्धि क स्थान मेंशान्ति युक्त प्रभाव की शक्ति से सुख उठाने वाला और संजान स्थान में सुख शक्ति व प्रभाव प्राप्त करने वाला और बुद्धि के अन्दर महान् गहरी और आदर्श प्रतिभा की शक्ति रखने वाला एवं बड़े लम्बे चौड़े और गहरे विचारों से काम लेने वाला और बुद्धि की शान्तमयी प्रखर शक्ति से भूमि का भी बहुत लाभ पाने वाला तथा लाभ प्राप्ति के स्थान में बहुत गहरे विचारों की शक्ति से बहुत तरक्की करने वाला और मातृस्थान के योग का फायदा पाने वाला कुछ नरम. गरम बुद्धि वाला होता है।
तुला का सूर्य लग्न से छठे स्थान में हो तो वह मनुष्य माता से कुछ विरोध व कुछ वियोग व कुछ कमी का 'योग पाने वाला और जमीन जायदाद की कमी पाने वाला तथा जन्मभूमि से अल-हदगी का योग पाने वाला और सुख प्राप्ति के साधनों में बहुत कमी पाये वाला और ननसाल पक्ष में भी कमी का योग पाने वाला और शत्रु स्थान में कुछ अशान्ति का योग पाने वाला तथा कुछ श्रम की अधिकता का योग भी पाने वाला और अधिक खर्च करने वाला तथा अन्य स्थानों के सम्पर्क की शक्ति से सुख के साधन प्राप्त करने वाला और कुछ अशान्त प्रद वातावरण में रह कर प्रभाव पाने वाला छिपी हिम्मत वाला होता है।
वृश्चिक का सूर्य लग्न से सातवें स्थान में हो तो वह मनुष्य माता से सेवा सुख प्राप्त करने वाला और गृहस्थी के अंदर प्रभावशाली आनन्द का योग पाने वालाऔर स्त्री स्थान से सुख संबंधी प्रभाव पाने वाला और लौकिक भोगादिक व सुखों की शक्ति पाने वाला और मकान आदि रहने के स्थान का भी प्रभाव पाने वाला और भूमि व्यवस्था के संबंध में दैनिक कार्य प्रणाली के अन्दर अच्छी योग्यता के द्वारा प्रभावयुक्त कार्य करने वाला और दैनिक रोजगार की लाइन में प्रभावशाली सुखद कर्म के द्वारा कर्म करके सुख उठाने वाला और गृहस्थी के सुखों की प्राप्ति के कारणों से देह में कुछ परेशानी अनुभव करने वाला तथा देह की उज्ज्वलता में कुछ कमी पाने वाला होता है।
धन का सूर्य लग्न से आठवें स्थान में हो तो वह मनुष्य अपनी माता के संबंध में कष्ट व अशान्ति का योग पाने वाला और मातृभूमि से वियोग पाने वाला और विदेश स्थान में महान् प्रभावशाली सहायक हितू प्राप्त करने वाला और ९सू जीवन की दिनचर्या में बड़ा प्रभाव और सुख का योग पाने बाला और विदेश भूमि पर भूमि अधिकार व प्रभाव पाने वाला और आयु स्थान में महा-नता पाने वाला अर्थात् मृत्यु के पश्चात् भी स्थिर प्रभाव की शक्ति छोड़ जाने वाला और पुरातत्त्व के स्थान में किसी बहुत भारी स्थाई शक्ति का प्रभाव पाने वाला और महान् गहबी और गम्भीर युक्तियों के कर्म से सुख का अनुभूव करने वाला' और धन की वृद्धि के लिये पुरातत्त्व स्थान की शक्ति से फायदा उठाने वाला होता है।
मकर का सूर्य लग्न से नवम स्थान में हो तो वह मनुष्य माता के सम्बन्ध में ऐसी अच्छाई का योग पाने वाला जिसके १२ रस में मिठास की कमी हो और भूमि आदि मकानादि का सामान्यतया सुन्दर लाभ पाने वाला और भाग्य के स्थान में कुछ नीरसता युक्त सुखों की प्राप्ति पाने वाला और धर्म के संबंध में भी कुछ नीरसता से युक्त सुख की साघ्रना पाने वाला और कुछ यश भी प्राप्त करने 'वाला और धर्म के संबंध में कुछ ज्ञान की गहराई का योग भी पाने वाला, और भाई बहन के स्थान से सुख का संबंध पाने वाला और पुरुषार्थ बल का भी सुख उठाने वाला तथा मेहनत के स्थान से प्रभाव पाने वाला भग्यवान् होता है।
कुम्भ का सूर्य लग्न से दसवें स्थान में हो तो वह मनुष्य माता की शक्ति का आनन्द कुछ नीरसता से प्राप्त करने वाला और पिता स्थान के सुख में कुछ वैमनस्यता का योग पाने वाला और मकान भूमि आदि के सुख प्राप्त करने बाला ओर राज समाज क संबंध में कुछ सामान्य सुख का योग पाने वाला ओर कार व्योपार में कुछ परिश्रम के साथ थोड़ा सुख उठाने वाला और मान प्राप्ति व उन्नति के मार्ग में कुछ अलकसाइट का योग पाने वांला और सुख प्राप्ति के स्थान की वृद्धि करने के लिये बहुत प्रयत्न करने वाला और आलस्य के कारणो से कभी २ हानियों का योग पाने वाली होता है।
मीन का सूर्य लग्न से ग्यारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य मातृस्थान से खूब लाभ पाने वाला तथा मकान भूमि आदि "तू का बहुत प्रभावशाली फायदा पाने वाला और आमदनी के स्थान में बहुत ही सुख और प्रभाव के साथ फायदा उठाने वाला तथा विद्या के स्थान सेसुख लाभ पाने वाला और संतान पक्ष से सुख शक्ति प्राप्त करने वाला और बुद्धि के अन्दर शांतियुक्त प्रभावशक्ति से काम लेकर बोलचाल करने वाला और विचारों के अन्दर बड़ी दूर तक की गहरी बातें सोचने वाला और सुख प्राप्ति के साधनों की बहुत सी प्रभावशाली वस्तुओं का खूब लाभपाने वाला बड़ा चतूर धैर्यवान् होता है।
मेष का सूर्य लग्न से बारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य बहुत ज्यादा खर्च करने वाला और खर्च के स्थान में भारी प्रभाव और सुख प्राप्त करने बड़ा वाला और मातृस्थान में कुछ हानि पानेवाला और मकान जायदाद की कुछ हानि करने वाला और अन्य स्थान की भूमियों पर सूख का प्रभावशाली संबंध पाने वाला और मातृ स्थान के संबंध से भी बहुत खर्च करने की शक्ति पाने वाला तथा ननसाल पक्ष के संबंध में सुख की कमी का योग पाने वाला और शत्रुस्थान में कुछ कमजोरी या लापर-वाही मानने दाला और अधिक खेर्च के कारणोंसे कुरु अशांति का योग पाने वाला होता है।
No comments:
Post a Comment