मेषलग्नान्तर केतुफलम्
मेष का केतु लग्न के पहिले स्थान में हो तो वह मनुष्य देह के स्थान में कुछ अशांति व कमी का योग पाने वाला और देह के सबध म कभी २ महान्सांघातिक चोट या वेदना का योग पाने तथा हृदय के अन्दर बड़ी भारी मज-बूती और गुप्त धैर्य की महान् शक्ति रग्बनं वाला ओर दूसरों के सामने दव कर रहने की बात बिलकुल न चाहने वाला किन्तु इसके विपरीत अधाधुंधी के साथ हेकड़ी व हठधर्मी से काम लेने वाला और गुप्त युक्तियों के बल से तथा महान् कठिन। इयों की सहन शक्ति के बल से किसी प्रकार की ख्याति प्राप्त करने की शक्ति पा लेने वाला और अपने अन्दर की किसी खास कमी का दुःख अनु-भव करने वाला होता है।
वृष का केतु लग्न से दूसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य धन के स्थान में कभी वड़ी हानि पाने वाला और धन की कमी के कारण से भी कष्ट का अनु-भव करने वाला तथा धान की वृद्धि करने के लिये बड़ी चतुराई के साधनों का पालन गुप्त हिम्मत के बल से करने वाला और धन के हर एक संबंध में बड़े धैर्य से काम लेने बालां और धन के पक्ष में कभी २ घोर संकट का सामना पाने वाला तथा अंत में किसी धन के संबंध की गुप्त शक्ति का साधन पा लेने से संतोष पाने वाला और कुटुम्ब स्थान में बहुत हानियों व क्लेश का साधन पाने वाला तथा धन के लिये अधाधुंध शक्ति एवं युक्ति का प्रयोग करने बाला होता है।
मिथुन का केतु लग्न से तीसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य भाई बहन के स्थान "में हानि व क्लेश का योग पाने वाला और अपने पुरुषार्थ बल में कुछ कम-जोरी पाने वाला किन्तु अपने शक्ति के अंदर बहुत गुप्त हिम्मत का बहुत भरोसा रखने वाला तथा छिपी हुई शक्ति से बहुत काम लेने वाला और कुछ अनुचित रीति से अपभी बहादुरी का परिचय देने वाला और अपने बल पुरु-षार्थ व हिम्मत के ऊपर कभी २ बड़े भीषण प्रहार सहने वाला और बड़ी से बड़ी मुशीबत के अंदर भी आन्तरिक धैर्य को न छोड़ने वाला और छिपे तौर से हमेशा अपनी स्वार्थ सिद्धि में लगा रहने वाला होता है।
कर्क का केतु लग्न से चौथे स्थान में हो तो वह मनुष्य माता के पक्ष में हानि पाने वाला और मातृ स्थान से कुछ अलहदगी पाने वाला और मकान भूमि आदि के संबध में कुछ हानि व कुमी का योग पाने वाला और सुख व आराम के स्थान में बहुत प्रकार से कमी व अशांति का योग पाने वाला और सुख प्राप्ति के स्थान में मजबूती पाने के लिये महान् परिश्रम व कठिनाइयां सहने वाला और अपने निज स्थान में कभी २ असहनीय दारुण विपत्ति का सामना पाने वाला और अंत में किसी सुख संबंध की मज-बूती को पा लेने वाला तथा सुख प्राप्ति के लिये अधाधुंद शक्ति का प्रयोग करने वाला होता है।
सिंह का केतु लग्न से पांचवें स्थान में हो तो वह मनुष्य संतान पक्ष में कष्ट सहन करने वाला तथा संतान की हानि " पाने वाला और विद्या की कमी पाने वाला तथा विद्या ग्रहण करने में बड़ी २ गहरी परेशानियां सहने वाला और विद्या स्थान व बुद्धि स्थान में और सतान स्थान में कभी कभी असहनीय दारुण संकट का योग पाने वाला और दिमाग के अन्दर अधिक गर्मी होने के कारण से अपने शब्दों के भाव दूसरों को न समझा सकने वाला और अपने बुद्धि की कमी को दूर करने के संबंध में महान् से महान् परिश्वप अंध विश्वास के साथ बराबर करते रहने वाला तथा कुछ छिपाव की बातों वाला होता है।
कन्या का केतु लग्न से छठे स्थान में हो तो वह मनुष्य शत्रु स्थान में महान् पुरुषार्थ शक्ति का परिचय देने बाला तया शत्रु को परास्त करने वाला और महान् से महान् कठिनाइयों व दिक्कतों की जरा भी परवाह न करने वाला और अपनी प्रभाव की बहुत उत्तति करने के लिये अधाधुंद शक्ति का प्रयोग करने वाला तथा ननसाल पक्ष में कुछ कमजोरी पाने वाला और शत्रु स्थान में कभी २ अचानक भीषण मुशीबत की आशंका यें, पाने वाला किन्तु वास्तव में हमेशा जीत में रहने वाला और बड़ी बहा-दुरी का दावा रखने वाला और पाप दोष की परवाह न करके स्वार्थ सिद्धि का पूरा ध्यान रखने वाला होता है।
तुला का केतु लग्न से सातवें स्थान में हो तो वह मनुष्य स्त्री स्थान में कुछ हानि और कुछ अशांति पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक की शक्ति केसंबध में विशेष अधिकार रखने वाला और रोजगार की लाइन में बहुत परि-श्रन करके गुप्त युक्ति व शक्ति से काम निकालने वाला और रोजगार के दायरे में कभी २ महान् कठिनाई का भीषण सामना पाने वाला किन्तु महान् धैर्य से हिम्मत के साथ समय के कार्य को करते रहने वाला और रोजगार के संबंध में अंत तक किसी स्थिर मजबूती को प्राप्त कर लेने वाला और प्रत्येक लौकिक कार्यों में कुछ कमी के बावजूद भी बड़े साहस के साथ उन्नति को प्राप्त करने वाला होता है।
वृश्चिक का केतु लग्न से अष्टम स्थान में हो तो वह मनुष्य पेट के अंदर निचलेव पिछले हिस्से में कुछ शिकायत पाने वाला और जीवन की दिनचर्या में बहुत अशांति अनुभव करने वाला और पुरा-तत्त्व की कुछ, हानि पाने वाला तथा जीवन की आयु के संबंध में कभी २सांघातिक हानिमां पाने वाला और अपने जीवन से संबंधित मार्ग में महान् हेकड़ी रखने वाला तथा तीक्ष्ण गुप्त युक्तियों के बल से निर्वाहक शक्ति में सहयोग पैदा करने वाला और महान् कठिन परिश्रम से जीवन का विकाश करने वाला और अंत तक जीवन में कुछ प्रसिद्धता पाने में सफल होने वाला व प्रभाव वाला होता है।
घन का केतु लग्न से नवम स्थान में हो तो वह मनुष्य भाग्य की उन्नति केलिये अधिक से अधिक परिश्रम करने वाला तथ। भाग्य के स्थान में बड़े २ महान् झंझटों का योग पाने वाला तथा कुछ गुप्त शक्ति के महान् प्रयोगों के द्वार। उन्नति का साधन पाने वाला और धर्म पालने क स्थान में वास्तविक धर्म का पालन करने वाला और महान् तामसी धर्म का बड़े रूप से बहुत पालन करने वाला और वास्तविक सुयश न पाकर तमोगुण की लाईन से यश प्राप्त करने वाला और फिर भी भाग्य स्थान में कुछ कमी नअशांति अनुभव करने वाला तथा बहुत बड़े आड-म्बर से भाग्य का चमत्कार पाने वाला शील रहित होता है।
मकर का केतु लग्न से दसवें स्थान में हो तो वह मनुष्य पिता स्थान में कुछ हानि व कुछ कमी व क्लेश का योग पाने वाला और कारोबार के अन्दर कुछ अधिक परिश्रम व परेशानी से काम करने वाला और उन्नति प्राप्त करने के लिये गुप्त शक्ति का प्रयोग बड़े धैर्य और साहस के साथ करने वाला और राज समाज के संबंध में बहुत दिक्कतों को सहने के बाद उन्नति व मान वृद्धि का साधन पाने वाला और मान प्रतिष्ठा के स्थान में कभी २ सांघातिक हानियों का योग पाने वाला और अपनी इज्जत की मजबूती में कुछ कमी का योग पाने पर भी बड़ी बहादुरी से काम लेने वाला होता है।
कुम्भ का केतु लग्न से ग्यारहवें स्थान मे हो तो वह मनुष्य बहुत लाभ पाने वाला तथा अधिक लाभ पाने के लिये अधिक प्रयत्न करने वाला और कुछ मुफ्त का सा लाभ सदैव प्राप्त करते रहने की सी योजनायें बनाने वाला और धने लाभ के स्थान में महान् धैर्य और कुछ गुप्त शदितयो से काम लेने वाला तथा लाभ के स्थान में किसी भी प्रकार की कमी का योग महसूस करने वाला और शेष में आमदनी के संबंध में कोई स्थाई योजना प्राप्त करने वाला और कुछ अनुचित लाभ उठाने की शक्ति रखने वाला तथा महान् स्वार्थ युक्त होकर अधाधुंदी से काम लेने वाला होता है।
मीन का केतु लग्न से बारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य खर्च अधिक करने वाला और खर्च के कारणों से कुछ कष्ट प्राप्ति के योग प्राप्त करने वाला तथा खर्च के मार्ग में कुछ बड़प्पन व हेकड़ी और बड़ी दृढ़ता से काम लेने बाला तथा महान् धैर्य की शक्ति के गुप्त बल से खर्च संचालन करते रहने वाला और कभी २ खर्च के मार्ग में भीषण संकटों का भी साममा पाने वाला और बाहरी अन्य स्थानों के संपर्क में बड़ी कठिनाइयों तथा परेशानियों का योग पाने वाला और बाहरी संबंध में अपनी कमजोरी या कमी की परवाह न करके आन्तरिक शक्ति के द्वारा बड़े भारी परिश्रम से काम निकालने वाला तथा अन्त में खर्च संचालन की स्थिर शक्ति प्राप्त करने वाला होता है।
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