Saturday, June 27, 2026

मेषलग्नान्तरशनिफलम्

मेष का शनि लग्न के पहिले स्थान में हो तो वह मनुष्य देह की सुन्दरता में व कद में कुछ कमी पाने वाला तथा पिता स्थान की तरफ से कमी का योगपाने वाला और आमदनी के सम्बन्ध मार्ग में कुछ परतन्त्रता का योग पाने वाला तथा कुछ बन्धन युक्त कर्म करने वाला और उन्नति पर पहुँचने के लिये बहुत २ प्रयत्न करते रहन पर भी विशेषता प्राप्त न कर सकने वाला और राज समाज का साधारण सुख प्राप्त करने वाला और दैनिक रोजगार की उन्नति में बहुत प्रयत्न करने वाला तथा मेहनत या पुरुषार्थ करने वाला भाई बहन के स्थान की कुछ पूति पाने वाला तथा इज्जत के लिये कुछ गुप्त कर्म व गुप्त चिन्ता का योग पाने वाला तथा स्त्री को विशेष महत्त्व देने वाला कुछ आलसी सा होता है।

वृष का शनि लग्न से दूसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य अपने कर्म और लाभ की शक्ति से बहुत धन कमाने वाला तथा घनं व इज्जत की शक्ति से बहुत मोटी आमदनी मुस्तकिल तौर से प्राप्त करने वाला तथा पिता स्थान की व कुटुम्ब की भी शक्ति प्राप्त करने वाला तथा राज समांज से बहुत लाभ पाने वाला औरमातृ स्थान में कुछ वैमनस्यता का योग पौने वाला तथा सुख प्राप्ति के साधनों को धन की शक्ति से एकत्रित करने वाला और जीवन की दिनचर्या में कुछ अशान्ति का योग पाने वाला तथा धन और इज्जत की स्थिर शक्ति पाने वाला तथा धन की वृद्धि के लिये महान् कर्म बन्धन क्ती शक्ति से काम लेने वाला होता है।

मिथुन का शनि लग्न से तीसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य महान् पराक्रम और पुरुषार्थ से उन्नति प्राप्त करन वाला तथा पिता की शक्ति का बहुत सह्योग लाभ पाने वाला और भाई बहेन का योग प्राप्त करने वाला तथा राज समाज में मान प्राप्त करन. वाला और अधिक खर्च के कारणों से कुछ खर्च सम्बन्धी अशान्ति का योग पाने वाला और संतान पक्ष के स्थान नें कुछ अ-शांति का वातावरण पाने वाला तथा उन्नति को प्राप्त करने के लिये बुद्धि में कुछ परेशानी प्राप्त करने वाला तथा मान प्राप्ति के ख्याल से अन्य बाहरी स्थानों में कुछ वैम-नस्यता का योग पाने वाला तथा धर्म पालन में कुछ नीर-सता रखने वाला अहंभावी होता है ।

 कर्क का शनि लग्न से चौथे स्थान में हो तो वह मनुष्य पिता से सुख उठाने वाला तथा अपने स्थान से कारबार करने वाला तथा मरलता से शान्ति पूर्वक लाभ पाने वाला और राज समाज से सुख उठाने वाला तथा मान व इज्जत का साधन रखने वाला और मातृ स्थान में कुछ अशान्ति युक्त वाता-वरण से गौरव लाभ करने वाला और  शत्रु स्थान में बड़े प्रभाव से काम लेने वाला तथा दिक्कत और मुसीबतों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति रखनेवाला और देह के स्थान में कुछ कमी व कुछ लापरवाही का योग पाने वाला और दुनियादारी के कारणों से आत्मा के अन्दर कुछ अशान्ति पाने वाला तथा कुछ परिश्रमी कर्म करने वाला होता है।

सिंह का शनि लग्न से पांचवें स्थान में हो तो वह मनुष्य पिता स्थान में कुछ कमी का योग महसूस करने वाला तथा पिता स्थान के सम्बन्ध से कुछ लाभ प्राप्ति का साधन पाने वाला और बुद्धि विद्या के स्थान से भी लाभ प्राप्त करने वाला तथा रोजगार की लाइन में बहुत उन्नति के लिये बहुत प्रयत्न करने वाला तथा इन्द्रिय भोगादिक की प्राप्ति के लिये बहुत उत्साह से काम लने वाला और स्त्री स्थान को विशष महत्त्व देने वाला तथा लौकिक व सामाजिक कार्यों के सम्बन्ध मार्ग में खूब मेहनत करने वाला और धन की वृद्धि के लिये खूब कर्म करनें वाला तथा संतान पक्ष में कुछ वैमनस्यता का योग पाने. वाला होता है ।

 कन्या का शनि लग्न से छठे स्थान में हो तो वह मनुष्य पिता स्थान में कुछ वैमनस्यता का योग पाने वाला तथा कुछ प्रभावशाली व कुछ परतंत्रता युक्त कर्म करने वाला और दिनचर्या मैं कुछ परेशानी महसूस करने वाला और शत्रु स्थान में बड़ा प्रभाव रखने वाला तथा दिक्कतों व मुसीबतों पर विजय पाने वाला और आमदनी के स्थान मार्ग से कुछ धिराव सा महसूस करने वाला और खच के स्थान में मजबूरियों के कारणों से अधिक खर्च करने वाला तथा अन्य स्थानों के सम्बन्ध में कुछ वैमनस्यता कां योग पाने वाला तथा अपने बल पुरुषार्थ की शक्ति से महान् कर्म करने वाला तथा बहन भाई से कुछ शक्ति का सम्पर्क रखने वाला होता है।

तुला का शनि लग्न से सातवें स्थान में हो तो वह मनुष्य पिता स्थान की शक्ति का बड़ा सहारा पाने वाला और बड़े जोर जोर से कार वारकरने वाला तथा दैनिक रोजगार की लाइन में महान् परिश्रम करने वाला तथा देह और आत्मा में कुछ अशांति का कारण महसूस करने वाला और भोग विलास के महान् साधन प्राप्त करने वाला तथा रोजगार की लाइन से बहुत फायदा पाने वाला और भाग्य की उन्नति के लिये बहुत २ प्रयत्न करने वाला तथा धर्म के वास्तविक रूप का पालन करके बाहरी धर्म का पालन करने वाला और अपने उग्र कर्मों के कारण माता से कुछ अशान्ति के साथ लाभका सम्बन्ध पाने वाला कुछ गुमानी होता है।

 वृश्चिक का शनि लग्न से अष्टम स्थान में हो तो वह मनुष्य पिता स्थान से परेशानी का योग पाने वाला औरउन्नति का स्थान प्राप्त करने के लिये महान् परिश्रम व क्कूट नीतियों से काम लेने वाला तथा आयु की वृद्धि पाने और लाभ प्राप्ति के लिये बहुत कठिन कर्म करने वाला और विदेश का सम्बन्ध पार्कर कुछ तरक्की करने वाला और महान् हठ योग्यता से काम लेने वाला और अपनी सुन्दर गहरी व गुप्त शक्ति व युक्तियों का बड़ा भरोसा रखने वाला तथा कामयावी पाने वाला किन्तु राज समाज में मान सम्मान के अन्दर कुछ कमी के साथ'वृद्धि 'पाने वाला और बुद्धि के अन्दर कुछ परेशानी पाने वाला तथा विद्या और संतान पक्ष में कुछ वैमनस्यता पाने वाला हेकड़ी रखने वाला होता है।

धन का शनि लग्न से नवम स्थान में हो तो वह मनुष्य भाग्य और कर्म की शक्ति से बहुत लाभ पाने वाला और बंधी हुई आमदनी पाने का अधि-कारी तथा बड़ा भाग्यशाली समझा जाने वाला और बहुत प्रकार से धर्म पालन करके धर्म की शक्ति को दिखाने वाला तथा पिता स्थान से सम्बन्धित लाभ पाने वाला तथाराज समाज की शक्ति का फायदा भाग्य की ताकत से प्राप्त करने वाला तथा शत्रु स्थान में बड़ा प्रभाव जमाने वाला और दिक्कतों व भंझटों पर विजय पाने वाला तथा महान् पुरुषार्थ व परिश्रम से लाभ पाने वाला तथा दैव या भग-वती की कृपा से व कुछ परिश्रम से प्रभाव की वृद्धि पाने वाला तथा कुदरती सफलता का अधिकारी होता है।

 

मकर का शनि लग्न से दसम स्थान में हो तो वह मनुष्य बड़ा भारी कार-वार करने वालाऔर बड़ी शान गुमान के साथ आमदनी पाने वाला पिंता स्थान की शक्ति का बड़ा लाभ और फायदा उठाने वाला तथा राज समाज के सम्बन्ध से बहुत लाभ व इज्जत पाने वाला और बहुत प्रकार से राजसी खर्च करने वाला तथा बहुत प्रकार से अन्य स्थानों का अधिक संबंध रखने वाला और मातु स्थान के सुम्पर्क में कुछ अरुचि रखने वाला और दैनिक रोजगार की लाइन में बड़ी जोरदारी से नगाड़े की आवाज की तरह मैदान में सफलता पाने वाला और भोग विलास के सम्बन्ध में महान् साधन प्राप्त करने वाला और उन्नति परं पहुँचने के लिये महान् कर्म करने वाला बड़ा स्वाभिमानी होता है।

 कुम्भ का शनि लग्न से ग्यारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य बहुत मजबूत आमदनी पाने वाला तथा इज्जत के कर्म से उन्नति पाने वाला तथा पिता स्थान के सम्बन्ध से भी फायदे का योग प्राप्त करने वालाऔर राज समाज से सम्बन्धित फायदा उठाने की स्वयं शक्ति प्राप्त कर लेने वाला और उन्नति के साधन मार्ग में अपनी देह की भी परवाह न करने वाला तथा देह व आत्मा में किसी प्रकार की कमी का योग पाने वाला और बुद्धि में कुछ परेशानी व चिड़चिड़ाहट का योग पाने वाला और संतान पक्ष से कुछ असंतोष पाने वाला तथा दिनचर्या के अन्दर कुछ परेशानी महसूस करने वाला तथा पुरातत्त्व शुक्ति की तरफ से कुछ असंतोष पाने वाला होता है।

मीन का शनि लग्न से बारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य पिता स्थान की तरफ से हानि का योग पाने वाला और बहु प्रकार से बहुत्व खर्च करने वाला और अन्य बाहरी स्थानों के सम्पर्क से कार व्यवसाय व आमदनी की शक्ति पाने वाला किन्तु मान प्रतिष्ठा के निज स्थान में कमी के कारणों का योग पाने वाला और धन की वृद्धि के लिये बहुत भारी प्रयत्न करते रहने वाला और कुटुम्ब स्थान से कुछ मान प्रतिष्ठा का संबंध रखने वाला तथा बाहरी स्थानों की सम्पर्क शक्ति के कर्मबल से भाग्यवान् समझा जाने वाला तथा धर्म के पालन के लिये कुछ अनेक प्रकार क थोड़े २ कर्म करते रहने वाला तथा शत्रु स्थान में प्रभाव रखने वाला होता है।.

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