मेषलग्नान्तर शुक्रफलम्
मेष का शुक्र लग्न के पहिले स्थान में नं हो तो वह मनुष्य बहुत शानदार रोज-गार करने वाला तथा धन कमाने वाला और सुन्दर देह वाला तथा वाला और भोग विलास की सुन्दर स्त्री शक्ति का सुन्दर आनन्द प्राप्त करनेवाला तथा महान् चतुराइयों से व कलाओं से काम लेने वाला और बहुत मान प्राप्त करने वाला और धर्न व कुटुम्ब का आनन्द पाने वाला तथा लौकिक कार्यों में बड़ी योग्यता व कुशलता रखने वाला और स्त्री के 'अन्दर बहुत बड़प्पन व योग्यता षाने वाला और गृहस्थ का. उत्तम. आनंद प्राप्त करने वाला और थनवान् समझा जाने वाला तथा इन्द्रियादिक सुखों को बड़ा महत्त्व देने वाला बड़ा कार्य कुशल इज्जतदार होता है।,
वृष का शुक्र लग्न से दूसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य बहुत धन प्राप्त करनें वाला तथा बहुत कुटुम्ब, वाला और ११ बहुत दरोजगार करने वाला तथा रोज-गार की लाइन से व चतुराइयों से धन संग्रह करने की शक्ति प्राप्त करने वाला और स्त्री स्थान के सुख संबंध में बंधनका योग पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक के संबंध में बहुत से साधन एकत्रित रखने वाला तथा जीवन की दिनचर्या में अमीरी के प्रभाव से आनन्द मानने वाला और पुरातत्त्व संबंध से धन का फायदा पाने वाला तथा मान व इज्जत प्राप्त करने वाला और गूढ़ व गुप्त चालों की युक्तियों से भी फायदा उठाने वाला तथा कुछ जीवन में बंधन सा मह-सूस करने वाला होता है।
मिथुन का शुक्र लग्न से तीसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य अपने पुरुषार्थ की चतुराइयों के कार्य से बहुत धन पैदा करने वाला तथा रोजगार करने कीबड़ी शक्ति रखने वाला और भाई बहन का सुन्दर योग पाने वाला तथा स्त्री के अन्दर प्रभावे वाला तथा सुन्दरता और धार्मिकता का योग पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक की शक्ति प्राप्त करने वाला तथा धर्म और कर्तव्य का भी ध्यान रखने वाला और भाग्य की उन्नति के लिये बहुत प्रकार से प्रयास करने वाला तथा इज्जतदार समझा जाने वाला और सुन्दरता व प्रभाव रखने वाला तथा लौकिक व कौटुम्बिक शक्ति का आनन्द पाने वाला चतुर होता है।
कर्क का शुक्र लग्न से चौथे स्थान में हो तो वह मनुष्य घन का सुख प्राप्त करने वाला और स्त्री का सुखप्राप्त करने वाला तथा स्त्री के अन्दर सुन्दरता सुघड़ता तथा मान अमीरी और शांति का योग पाने वाला तथा गृहस्थी व माता का सुन्दर सम्पर्क पाने वाला तथा.मकान जायदाद की शक्ति पाने वाला और कुटुम्ब का सुख प्राप्त करने वाला तथा रोजगार का सुख प्राप्त करने बाला और धन व रोजगार की शक्ति से राज समाज में मान पाने वाला तथा तरक्की करने वाला और पिता स्थान की सहायक शक्ति प्राप्त करने वाला और शांति पूर्वक गहरी चतुराइयों के योग से लौकिक सुखों की शक्ति का आनन्द लेने वाला होता है ।
सिंह का शुक्र लग्न से पांचवें स्थान में हो तो वह मनुष्य बुद्धि की चतुराइयों के द्वारा किसी प्रकार की कला से रोजगार करने वाला और बुद्धि बल की मेहनत से धन पैदा करने वाला तथा गृहस्थी व स्त्री के सुख की कुछ कमी महसूस करने वाला और इंन्द्रिय भोगा-दिक का बहुत चिंतन करने वाला तथा दिमाग की शक्ति से बहुत लाभ पाने वाला किन्तु दिमाग में परेशानी पाने तथा सन्तान पक्ष में कुछ बंधन महसूस करने वाला एवं बातों की चतुराइयों से काम निकालने वाली और बहुते प्रकार से बहुत लाभ पाने के लिये बुद्धि पर बहुत जोर देने वाला और कुटुम्ब की तरफ से कुछ रंज मानने' वाला विद्या युक्त होता है।
कन्या का शुक्र लग्न से छठे स्थान में हो तो वह मनुष्य धन की तरफ से बढ़ी चिन्ता मानने वाला तथा कुटुम्ब की हानि पाने वाला एवं स्त्री की तरफ से बड़ी अशांतिपार्ने वाला और इन्द्रिय भोगादिक की बहुत कमी पाने वाला किन्तु भोगादिक कुछ अनु-चित लाभ पाने वाला और रोजगारकी लाइन में बहुत कमजोरी तथा बहुत परिश्रम और परेशानियों के द्वारा काम चलाने वाला किन्तु रोजगार के संबध में गुप्त पेचीदा तरकीबों से काम लेने वाला तथा ननसाल पक्ष की कमजोरी पाने वाला और बहुत खर्च करने वाला और अन्य स्थानों का विशेष सम्पर्क रखने वाला तथा शत्रु स्थान में नरभाई तथा गुप्त युक्तियों से काप्न निकालने वाला और दरोगादिक भंझटों में धन का कुछ संकीर्ण संबंध से लेन देन करने वाला होता है।
तुला का शुक्र लग्न से सातवें स्थान में हो तो वह मनुष्य कुटुम्ब और रोजगार की लाइन से बहुत धन पैदा करने वाला और धन की शक्ति से रोजगारमें तरक्की माने वाला तथा सुन्दर स्त्री एवं मालदार ससुराल पाने वाला और स्त्री ध गृहस्थी की सुन्दर शुक्ति के अन्दर भी एक प्रकार का थोड़ा बंधन सा पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक की शक्ति के अन्दर कुछ बंधन और कुछ वृद्धि का योग पाने वाला तथा रोजगार की लाइन में बड़ी भारी शक्ति कला और चतुराइयों से काम लेने वाला तथा बहुत इज्जत. व मान प्राप्त करने वाला और लौकिक कार्यों में बड़ी सामर्थ्य का परिचय देने वाला तथा देह में. शोभा पाने वाला होता है।
वृश्चिक का शुक्र लग्न से आठवें स्थान में हो तो वह मनुष्य धन की शक्ति की बहुत कमजोरी पाने वाला तथा पुरातत्त्व धन का फायदा पाने वाला और मौजूदा धन में अक्सर हानियां पाने वाला और गूढ़ व गुप्त और परि-श्रम की युक्तियों के द्वारा रोजगार की लाइन से धन कमाने वाला और विदेश आदि के योग संबंध से सफ़लता पाने वाला और स्त्री स्थान की हानि पाने वाला तथा गृहस्थ के अन्दर बड़ी परेशानी तथा बंधन का योग पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक की बड़ी कमी पाने वाला और जीवन की दिनचर्या में कुछ अमीदी का ढंग और गहरी चतुराइयों की कला का पाने वाला गुप्त भोगी होता है।
धन का शुक्र लग्न से नवम स्थान में हो तो वह मनुष्य भाग्य की शक्ति और रोजगार की लाइन से धन की प्राप्ति ११ पाने वाला और भाग्य तथा धन की ताकत से रोजगार में तरक्की पाने वाला एवं स्त्री की सुन्दर दाक्ति का योग भाग्यवानी से पाने वाला और स्त्री के अन्दर धार्मिक व लौकिक भावनाओं का संमिश्रण पाने वाला तथा स्वयं भाग्यवान् समझा जाने वाला और उन्नति की प्राप्ति के लिये पुरुषार्थ करने वाला तथा बहन भाई का योग पाने वाला और गृहस्थी व लौकिक कार्यों में धर्माचरण करने वाला तथा कुछ इन्द्रिय संयम से फायदा उठानेवाला बड़ा चतुर मानयुक्त इज्जतदार होता है।
मकर का शुक्र लग्न से दसवें स्थान में हो तो वह मनुष्य बहुत ऊँचे दर्जे का रोजगार करने वाला तथा बहुत मान के साथ चतुराइयों से धन कमाने वाला और पिता स्थान में बड़ी मदद पाने वाला तथा राज समाज में इज्जत पाने वाला और स्त्री स्थान का बड़ा गौरव पाने वाला तथा भोग विलास की महानता पाने वाला और लौकिक कार्यों में बड़ी भारी, प्रवीणता व दक्षता रखने बाला और गृहस्थी सुख का बड़ा सुन्दर आनन्द पाने वाला और धन की शक्ति से व नित्यं प्रति की मेहनत से बहुत उन्नति करने वाला तथा भूमि आदि मकानादि का सुख प्राप्त करने वाला और कौटुम्बिक शक्ति की महानता पाने वाला तथा मातृ सुख प्राप्त करने वाला बड़ा चतुर होता है।
कुम्भ का शुक्र लग्न से ग्यारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य रोजगार की लाइन में बडी चतुराइयों के द्वारा बहुत आम-दनी पाने वाला तथा धन की ताकत से और नित्य के कार्यक्रम की मेहनत से धन की वृद्धि करने वाला और स्त्री स्थान का बड़ा सुन्दर लाभ पाने वाला तथा इन्द्रिय भोगादिक पदार्थों की महत्ता का लाभ पाने वाला तथा अनेक प्रकार के कीमती व सौन्दयंयुक्त पदार्थों का भी लाभ पाने वाला और गृहस्थी का अपूर्व लाभ तथा आनन्द पाने वाला एवं लौकिक कार्यों की निपुणता और चतुरता से बहुत लाभ पानेवाला तथा संतान भाव में गृहस्थ सुख के ख्याल से कुछ कमी का योग महसूस करने वाला तथा विद्या में भी कुछ कमी का योग या अरुचि का योग पाने वाला होता है ।
मीन का शुक्र लग्न से बारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य बहुत धन खर्च करने वाला तथा घन स्थान की बड़ी हानि पाने वाला और गृहस्थ व कुटुम्बकी भी हानि पाने वाला स्त्री स्थान में भी हानि या अशांति पाने वाला तथा अन्य स्थानों के संयोग (संपर्क) से गृहस्थी की व स्त्री की शक्ति पाने वाला और अन्य स्थानों के सम्पर्क से ही रोजगार की लाइन में तरक्की पाने वाला और इन्द्रिय भोगादिक के संबंध में अधिक खर्च करने वाला और बाहरी. स्थानों के संबंध में कार्य कुशलता की विशेष शक्ति रखने वाला और शत्रु पक्ष व. झगड़े आदि के संबंध में व ननसाल पक्ष में कमजोरी के योग से काम निकालने वाला होता है।
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