डबल व त्रिबल मंगली दोष क्या होता है?
कैसे होता है?
प्रायः ज्योतिषी लोग कहते हैं कि यह कुण्डली तो डबल मंगलीक ,त्रिबल मंगलीक है। मंगल डबल कैसे हो जाता है? यह कौन सी विधि (गणित) है? इसका समाधान इस प्रकार है।
1. जब किसी कुण्डली के 1/4/7/8 या 12वें भाव में मंगल हो तो वह कुण्डली मंगलीक कहलाती है। इसे हम (सिंगल) मंगलीक कह सकते हैं।
2.इन्हीं भावों में यदि मंगल अपनी नीच राशि में होकर बैठा हो तो मंगल द्विगुणित प्रभाव डालेगा तो ऐसे में वह कुण्डली डबल (द्विगुणित) मंगलीक कहलाएगी।
3. अथवा 1/4/7/8/12वें भावों में शनि, राहु, केतु या सूर्य इनमें से कोई ग्रह हो तथा मंगल हो तो ऐसे में भी यह कुण्डली उबल (द्विगुणित) मंगलीक कहलाएगी।
4.मंगल नीच का 1/4/7/8/12 भावों में हो, साथ में यदि राहु, शनि, केतु या सूर्य हो तो ऐसे में यह कुण्डली त्रिबल (ट्रिबल) मंगलीक कहलाएगी क्योंकि मंगल दोष इस कुण्डले में तीन गुणा बढ़ जाता है।
5. इस प्रकार से एक कुण्डली अधिकतम पंचगुणित मंगल दोष वाली हो सकती है। तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए।
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