Saturday, July 11, 2026

वृषलग्नान्तरगुरुफलम्

वृष का गुरु लग्न क पहिले स्थान में हो तो वह, मनुष्य बड़ी चतुराई और रगु के परिश्रम से लाभ पाने वाला तथा आयु प्राप्त करने वाला एवं देह लाभ के संबंध में हृदय की गूढ़ युक्तियों के द्वारा मान सहित प्राप्ति पान' वाला और देह के अन्दर सुन्दरता व कुछ स्वास्थ्य में कमी पाने वाला एवं जीवन की दिनचर्या में कुछ तड़प्पन व महत्त्व पाने' वाला एव विद्या स्थान में कुछ लल्भ तथा योग्यता और गुप्त युक्तियों की शक्ति का याग भी रखने वाला और भाग्य स्थान में कुछ हानि व कुछ लाप-रवाही का योग पाने वाला तथा धम स्थान म कुछ हान व कुछ अरुचि का योग पाने वाला तथा गृहस्थी के स्थान में कुछ जीवन के लाभ का योग पान वाला एंव दोनक रोजगार का व पुरातत्त्व के संम्बन्ध का लाभ पाने वाला व कुछ संतान सम्बन्ध का सुख दुःख पान वाला होता है।

मिथुन का गुरु लग्न से दूसरे स्थान में  हो तो वह मनुष्य पुरातत्त्व घन का लाभ पाने वाला ओर आयु का लाभ पाने वाला एवं वर्तमान घन के स्थान में कभी कभी कुछ हानियों के योग पाने वाला और घन की वृद्धि करने क लिये कुछ गूढ़ युक्तियों से व परिश्रम से काम लेनेवाला तथा शत्रु स्थान में बड़ी युक्तियों से व प्रभाव से काम निकालने वाला, जीवन की दिनचर्या में कुछ अमी-रता का ढंग पाने वाला और पिता के स्थान में कुछ वैम-नस्यता का योग पाने वाला तथा राज समाज के संबंध में भी कुछ अरुचि त कुछ परेशानी का ोग पाने वाला और मान प्राप्ति करने वाला तथा परेशानियों को हटाने के लिये परेशानियों वाले शस्त्र से ही लाभ लेने वाला होता है।

 कर्क का गुरु लग्न से तीसरे स्थान में हो तो वह मनुष्य बहुत लाभ पाने वाला बड़ा पराक्रमी तथा बड़ा प्रभावशाली और आयु स्थान की वृद्धिपाचे वाला तथा पुरातत्त्व शक्ति का लाभ पाने वाला व जीवन की दिनचर्या में. बड़ा भारी गौरव मानने वाला और बहन भाई के स्थान में केवल प्रभुत्व रखने वाला व भाग्य स्थान को पुरुषार्थं के मुकाबले में कमजोर मानने वाला तथा घर्म स्थान को भी थोड़ा कम महत्त्व देने वाला और ईश्वर की निष्ठा में कुछ कमजोरी मानने वाला और अधिक लाभपाने के लिये महान् रूप से गूढ़ युक्तियों का इस्तेमाल व महान् परिश्रम करनेवाला, हृदय तथा बाहुबल में बड़ी शक्ति का संचार पाने वाला और दैनिक रोजगार और गृहस्थी के संबंध में जीवन शक्ति का लाभ पाने के लिये महान् प्रयत्न करनें वाला होता है ।

 सिंह का गुरु लग्न से चौथे स्थान म हो तो वह मनुष्य बहुत आयु पाने वाला तथा जीवन में प्रसिद्धता पाने वाला और पुरातत्त्व शक्ति का बहुत सुख लाभ पाने वाला तथा माता के स्थान में कुछ वियोग पाने वाला, गूढ़ तथा पेचीदा युवितयों से बहुत ज्यादा काम लेने वाला व बहुत अधिक खर्च करने तथा विदेश आदि अन्य स्थानों के सम्पर्क का बड़ा भारी सुख सम्बध पाने वाला और पिता स्थान में वैमनस्यता का व कुछ हानि का योग पाने वाला व वावश्यक पदार्थों का खूत्र लाभ पाने वाला और आमदनी के संबंध में सुख युक्त बहुत परिश्रम के योग से प्राप्ति पाने वाला तथा राज समाज से वैमनस्यता 'पाने त्राला बड़ी गुप्त शक्डि वाला होता है।

कन्या का गुरु लग्न से पांचवें स्थान में हो तो बह मनुष्य संतान पक्ष में कुछ हानि व लाभ का योग पाने वाला और विद्या स्थान में भी कुछ कमी के साथ लाभ का योग पाने वाला तथा पुरातत्त्व से संबंधित बुद्धियोग द्वारा लाभ पाने वाला और धर्म स्थान में कुछ अश्रद्धा रखने वाला और भाग्यस्थान को कम महत्त्व देने वाला एवं ईश्वर में कम विश्वास रखने वाला तथा अपने व्यक्ति-त्व में कुछ बड़प्पन मानने वाला और लाभ प्राप्ति केलिये बुद्धिसे त हृदय से बहुत परिश्रम करने वाला और विद्या बुद्धि के अन्दर बड़ी गूढ़ युक्तियों से काम लेने वाला तथा बात चीतों के अन्दर बड़ी पेचीदा ढंग से छिपाव शक्ति का सहारा लेकर काम चलाने वाला होता है।

 तुला का गुरु लग्न से छठे स्थान में हो तो वह मनुष्य कुछ प्रभाव व कुछ परतंत्रता युक्त कर्म द्वारा परेशानियां सह कर लाभ प्राप्ति करने वाला और जीवन की दिनचर्या में कुछ घुमाव सा हृदय में महसूस करने वाला तथा आयु के संबंध में कुछ कमजोरियों का अनु-मान करने वाला और पिता के स्थान में वैमनस्यता का योग पाने वाला एवं राज समाज के अन्दर अरुचि का सा भात्र रखने वाला व आमदनी में कमी महसूस करने वाला, खर्च अधिक करने वाला तथा अन्य स्थानों के सम्पर्कमें जीवन का कुछ सुझाव लाभ पाने वाला तथा घन के संग्रह स्थान में कुछ हानि लाभ का योग, पाने वाला तथा बड़ी पेचीदा युक्तियों से व कठिनाइयों से पुरातत्त्वका लाभ पाने वाला होता है।

 वृश्चिक का गुरु लग्न से सातवें स्थान  में हो तो वह मनुष्य जीवन में शान गुमान रखने वाला तथा स्त्री स्थान में कुछ लाभव कुछ परेशानी का योग पाने वाला तथा विदेश संबंध के योग से स्त्री पक्ष में कुछ महत्त्वदायक लाभपाचे वाला एवं दैनिक रोजगार कीलाइन में कुछ परिश्रम व हृदय की गूढ युक्तियों के बल से स्थाई लाभ पाने वाला और विदेश आदि के संबंधों से मह-त्त्वदायक फायदा उठाने वाला और अपने लाभ के स्थान में अनधिकार लाभ का फायदा भी उठाकर स्वार्थ सिद्धि करने में तत्पर रहने वाला तया रोजगार व गृहम्थ की वास्तविक ठोस उन्नति व शांति के स्थान में कुछ हानि का योग पाने वाला एवं आयु की वृद्धि पाने वाला और हृदय शक्ति के बल से रोजगार की लाइन में कुछ पुरातत्त्व का लाभ पाने वाला और बड़ा भारी पुरुषार्थ करने बाला बहन भाई वाला तथा लाभ प्राप्ति के लिये लौकिक कार्यों में कुछ कटुयुक्ति से काम लेने वाला होता है।


 धन का गुरु लग्न से आठवें स्थान में हो. तो वह मनुष्य लाभ व आमदनी के संबंध में विदेश आदि का योग पाने वाला तथा आय की वद्धि पारे वाला एवं दैव बल से संबंधित पुरातत्त्व के महान् लाभ पाने वाला व खूब खर्च  करने वाला तथा अन्य स्थानों का विशेष सबंध रखने वाला और लाभ प्राप्ति के मार्ग में बहुत परिः श्रम तथा गूढ युक्तियों से काम लेने वाला और सुख प्राप्ति की वृद्धि करने के लिये महान् प्रयत्न करने वाला तथा मात्-स्थान में कुछ हानि लाभ का योग पाने वाला और घन संग्रह करने के लिये बड़ा प्रयत्नशील रहने वाला व जीवन की दिनचर्या में बड़ा गौरव व मस्ती का योग पाने वाला और अपने इस्तेमाली पदार्थों के संबंध में कुछ लाभ की कमी पाने वाला तथा कुटुम्ब स्थान में कुछ हानि लाभ का योग पाने वाला होता है।

 मकर का गुरु लग्न से नवम स्थान में हो तो वह मनुष्य अपने भाग्य स्थान में महान् हानि का योग पाने वाला और धर्म के स्थान में बहुत हानि पाने वाला व आयु स्थान में कुछ कमजोरी पाने वाला तथा पुरातत्तत्र लाभ की हानि पाने वाला और जीवन की दिन-चर्या में कुछ अशान्ति अनुभव करने वाला व लाभ प्राप्ति के लिये कुछ धर्म की हानि करने वाला और आमदनी के स्थान में कमजोरी पाने वाला व ईश्वर की निष्ठा में बड़ी कमजोरी पाने वाला और छापने पुरुषार्थ को बड़ा मानने वाला और देह में ब प्पन भानने वाला एवं विद्या स्थान में बड़ी भारी गूढ़ चतुराइयों से काम लेने वाला और संतान पक्ष में कुछ हानि लाभ का योग पाने वाला और बातचीत के अन्दर बड़ी सफाई का व दूरअन्देशी की बातें जंचाने वाला तथा कुछ बहन भाई का योग पाने वाला होता है।

 कुम्भ का गुरु लग्न से दसवें स्थान में हो तो वह मनुष्य कुछ विदेश का संबंध पाने वाला व पिता स्थान में कुछ २ हानि व कुछ वैमनस्यता और कुछ लाभ पाने वाला तथा आयु का कुछ लाभ पाने वाला और हृदय से संबंधित परिश्रमी कर्म और कष्ट साध्य युक्तियों से कारवार चलाकर लाभ पाने वाला तथा राज समाज केस्थान में कुछ कमजोरी पाने वाला और पुरातत्त्व का थोड़ा लाभ पाने वाला और दुनिया की परवाह न करके अपने तरीके से मानयुक्त रह कर जीवन की दिनचर्या व्यतीत करने वाला और धन की वृद्धि करने के लिये तथा प्रभाव को वृद्धि करने के लिये हृदय बल की ताकत से साम दाम दण्ड भेद की नीति को बरतने वाला मातुस्थान के सुख की कमी को कुछ पैदा करके फिर कमी को दूर करने के लिये दिलचस्पी में काम लेने वाला होता है।

 मोन का गुरु लग्न से ग्यारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य आयु की वृद्धि. पाने वाला और पुरातत्त्व धन का स्वतः लाभ्र पाने वाला, लाभ व आमदनी के लिये हृदय का पूर्ण बल तथा विदेश का संबंध योग पाकर परिश्रम व युक्तियों के द्वारा सफलता पाने वाला तथा लांभकी शक्ति से पुरुषार्थ बल की अधिक वृद्धि करने का प्रयत्न करने वाला और दैनिक बोजवार में सफलता पाने के लिये महान् उत्साह व महान् परिश्रम की शक्ति से काम लेने वाला और भाई बहन के स्थान में कुछ कटुता युक्त संबंध योग पाने वाला और स्त्री भोगादिक के स्थान में कुछ अन-धिकार लाभ पाने का प्रयत्न करने वाला तथा गुप्त शक्तियों के बल से अनेक लाभ पाने वाला होता है।
 मेष का गुरु लग्न से बारहवें स्थान में हो तो वह मनुष्य अधिक खर्च करने वाला और अन्य दूसरे स्थानों के योग द्वारा व पुरातत्त्व के स्थान संबंध से लाभका योग पाने वाला और आयु के संबंध में कुछ कमजोरी के साथ सफलता पाने वाला और लाभप्राप्ति के लिये बड़ीमहान् कठिनाइयों के कर्म से व गूढ़ युक्तियों के योग से सफलता पाने वाला और जीवन की दिनचर्या में खर्च की शक्ति का गौरव तथा अन्य स्थान की शक्ति का गौरव पाने वाला और बाहरी संबंध से सुख के साधनों की शक्ति बनाने वाला और मातृस्थान के संबंध में कुछ कमजोरी पाने वाला और भनसाल पक्ष में कुछ वैमनस्य पाने वाला और इस्तेमाली पदार्थों में कुछ कमी पाने वाला होता है।


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