Tuesday, July 14, 2026

शुभ-काल

गृहारम्भ के लिये शुभ समय  फाल्गुन, वैशाख, माघ, श्रावण, एवं कार्तिक मास हैं। इन मासों के भी शुक्ल पक्ष ग्राह्य होते हैं। ये मास गृहकर्त्ता को पुत्र-पौत्र एवं धन प्रदान करते हैं-

पौषफाल्गुनवैशाखमाघश्रावणकार्तिकाः मासाः स्युः गृहनिर्माणे पुत्रारोग्यफलप्रदाः ॥

 मासे तपस्ये तपसि माधवे नभसि त्विषे । ऊर्जे च गृहनिर्माणे पुत्रपौत्रधनप्रदम् ।। 1

(वास्तुप्रबोध)

इसके अतिरिक्त राशियों पर सूर्य की स्थिति भी विचारणीय होती है। कुछ विद्वानों के मतानुसार 
मेष का सूर्य होने पर चैत्र मास में, 
वृष के सूर्य में ज्येष्ठ मास में,
कर्क के सूर्य में आषाढ़ मास में, 
सिंह के सूर्य में भाद्र मास में, 
कुम्भ के सूर्य में आश्विन (क्वार) मास में, 
वृश्चिक के सूर्य में अगहन मास में, 
मृगशीर्ष के सूर्य में पौष मास में एवं 
मकर के सूर्य में माघ मास में गृहारम्भ किया जा सकता है-

केचिन्मेषरवौ मधौ वृषभगे ज्येष्ठे शुचौ कर्कटे । 
भाद्रे सिंहगते घटे आश्वियुजि चोर्जेऽलौ मृगे पौषके ।
 माघे नक्रघटे शुभं निगदितं गेहे तथोजें न सत् ।।
(वास्तुप्रबोध)
'वास्तुप्रबोध' में १२ मासों में गृहारम्भ का फल इस प्रकार वर्णित है-
चैत्र -व्याधि
वैशाख -धन, रत्न
ज्येष्ठ -मृत्यु
आषाढ़ -नौकरों एवं रत्नों का लाभ
श्रावण -मित्र-लाभ
भाद्रपद -हानि
आश्विन -स्त्री-हानि
कार्तिक -धन-धान्य का लाभ
मार्गशीर्ष -धन-लाभ
पौष -चोरी का भय
माघ -अग्निभय
फाल्गुन-सुवर्ण आदि का लाभ

 इन सबके अतिरिक्त हरि-शयन एवं भूमि-शयन के काल का भी विचार करना
गृहारम्भ के समय मास एवं सूर्य की स्थिति के साथ ही चन्द्रमा की स्थिति भी विचारणीय होती है। 
गृह के मुख्य द्वार के सम्मुख, पृष्ठ एवं वाम भाग में चन्द्रमा की स्थिति वर्जित है-
धनलाभः प्रवासः स्याद् रिपुश्चौरभयं क्रमात् ।
दक्षाग्रवामपृष्ठस्थे गृहभर्तुर्निशाकरे ।
ऋक्षं चन्द्रस्य वास्तोर्हि अग्ने पृष्ठे न शस्यते ।
(वास्तुसौख्य)
गृहारम्भ अर्धरात्रि में एवं मध्याह्न में भी नहीं करना चाहिये।

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