Tuesday, July 14, 2026

नाग-वास्तु

भूमि पर गृह-निर्माण का कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व नाग-वास्तु की स्थिति का भी विचार किया जाता है। गृहारम्भ के लिये उत्खनन कार्य किस मास में किस दिशा से प्रारम्भ किया जाय, इसका विचार नाग-वास्तु द्वारा किया जाता है। यह नाग-वास्तु वस्तुतः मास एवं राशियों से सम्बद्ध कालरूपी सर्प है। इसके सिर एवं पूँछ की ओर खुदाई न प्रारम्भ कर कुक्षि-स्थान पर खुदाई प्रारम्भ करनी चाहिये। 

नाग-वास्तु का सिर

 भाद्र, आश्विन एवं कार्तिक मास में पूर्व दिशा में;

 मार्गशीर्ष (अगहन), पौष एवं माघ में दक्षिण दिशा में,

 फाल्गुन, चैत्र एवं वैशाख में पश्चिम दिशा में तथा 

ज्येष्ठ, आषाढ़ एवं श्रावण में उत्तर दिशा में होता है।

पूँछ सिर के विपरीत दिशा में होती है।

 उपर्युक्त काल में (३-३ महीनों में) नाग की कुक्षि क्रमशः दक्षिण, पश्चिम, उत्तर एवं पूर्व में होती है। 

'वास्तुसौख्य' के अनुसार-

पूर्वादिक् शिरः कृत्वा नागाः शेते त्रिभिस्त्रिभिः । भाद्राद्यैर्वामपार्श्वेन तस्य क्रोडे शुभं गृहम् ।।

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