Wednesday, June 24, 2026

चन्द्रमा  - सूर्य 

अथाय राशिभोवाध्यायप्रकारः । 

चन्द्रात्प्रथमगो भानुर्जन्मकाले यदा भवेत् । 
विदेशगामी भोगी च कलहे कृतवासनः ।। १ ॥

जिसकी कुण्डली में चन्द्रमा और सूर्य दोनों एक ही घरमें बैठे हों वह मनुष्य परदेश में जाने वालो, भागों का भोगने वाला और कलह करने में मन रखने वाला होता है ॥ १ ॥

जन्मकाले यदा भानुर्दितीयो यदि चंद्रतः ।
 बहुभृत्ययशाश्चैव राजमान्यो भवेन्नरः ॥ २ ॥

यदि जन्म के समय चन्द्रमो से द्वितीय घरमें सूर्य बैठा है। तब वह मनुष्य अनेक भृत्यों को रखने वाला बडा यशस्वी और राजमान्य होता है ॥ २ ॥

चन्द्राद्भानुस्तृतीयश्च जन्मकाले यदा भवेत् । 
स्वर्णार्थी शोशुचिश्चैव राजतुल्यो भवेन्नरः ॥ ३ ॥

और जिसकी कुडली में चन्द्रमा से तीसरे घरमें सूर्य हो वह मनुष्य सुवर्ण की चाहना करने वाला, बहुत सोच करने वालो तथा उसी के कारण राजा के तुल्य भधिक जनों का स्वामी होता है ॥ ३ ॥

चंद्राच्चतुर्थगो भानुजन्मकाले यदा भवेत् । 
गणकाःकथर्यत्येव मातृहास्ते न भक्तिमान् ॥ ४ ॥

और जिसकी कुंडली में चन्द्रमा से चतुर्थ स्थानमें सूर्य होता है तब ज्योतिषी लोग ऐसा कहते हैं कि वह मनुष्य अपनी माता का मोरने वाला होता है, उसकी भक्ति करने वाला नहीं ॥ ४ ॥

चंद्रात्पंचमगो भानुर्जन्मकाले यदा भवेत् । 
सुतामिश्चासुखी चैव बहुपुत्री भविष्यति ॥ ५ ॥

और जिसकी कुंडली में चन्द्रमा से पंचम घरमें सूर्य बैठा हो तब वह मनुष्य कन्याओं के निमित्त से दुःख पाने वाला तथा बहुत पुत्रों से युक्त होता है ॥ ५॥

चंद्रात्षष्ठगतो भानुर्जन्मकाले यदा भवेत् ।
 शत्रूणां विजयी शूरःक्षत्रकर्मरतः सदा ॥ ६ ॥

 जिसकी कुण्डली में चन्द्रमा से छटे घरमें सूर्य बैठा हो तब वह मनुष्य शत्रु जनों का जीतने वाला, शूरवीर और सदा क्षत्रियों के कर्म में निरत होताहै ॥ ६ ॥

जन्मकाले यदा भानुचंद्रात्सप्तमगो भवेत् । 
सुत्री सुशीलचारी च राजमान्यो महातपाः ॥७ ॥

और जिसकी कुंडली में चन्द्रमां से सप्तम घरमें सूर्य वैठा है। तब वह मनुष्य सुन्दर भार्या वाला, सुशील आचरण करने वाला, राजा से सत्कार पाने वाला, और महा तपस्वी होता है ॥ ७ ॥

चंद्रादष्टमगो भानुर्जन्मकाले यदा भवेत् ।
 सर्वदा क्लेशकारी च ह्यतिरोगात्प्रपीडितः ॥ ८ ॥

और जिसकी कुंडली में चन्द्रमा से अष्टम घरमें सूर्य बैठा हो तब वह मनुष्य सदा लेश करने वाला और अत्यन्त रोगों से पीडित होता है ॥ ८ ॥

चंद्रान्नवमगो भानुर्जन्मकाले यदा भवेत् । 
धर्मात्मा सत्यवादी च बंधुक्लेशी सदा भवेत् ॥ ९॥

और जिसकी कुडली में जन्म समय में चन्द्रमा से नवें घरमें सूर्य वैठाहो तब वह मनुष्य धर्म करने वाला और सत्य बोलने बोला सदा भाई बन्धु से द्वेष करने पाला होता है ॥ ३ ॥

चन्द्राद्दशमगो भानुर्जन्मकाले यदा भवेत् । 
तस्य द्वारेषु तिष्ठति धनांतो न संशयः ॥ १० ॥

और जिसकी कुंडली में चन्द्रमा से दशम घरमें सूर्य हो तब उस मनुष्य, के द्वार पर बडे धनवान् खडे रहते हैं इसमें संदेह नहीं ॥ १० ॥

चंद्रादेकादशे भानुर्जन्मकाले यदा भवेत् ।
 राजगर्व्यतिवेत्ता च प्रसिद्धःकुलनायकः ॥ ११ ॥

जिसकी कु'डली में चन्द्रमासे ग्यारहवें घरमें सूर्य बैठा हो वह मनुष्य राजगर्क बौला, वहुज्ञ, सर्वत्र प्रसिद्ध, और कुलका स्वामी होता हैं ॥ ११ ॥

चंद्राद्वादशगो भानुर्जन्मकाले यदा भवेत् ।
 लग्नद्वादशगे अंधश्चंद्रात्काणोऽयमुच्यते ॥ १२ ॥

और जिसकी जन्म कुण्डली में चन्द्रमा से बारहवें घरमें सूर्य वैठा हो बह मनुष्य काण्णा होता है क्यों कि ऐसा लिखा है कि लग्न से वारहवें घर में सूर्य हो तब वह मनुष्य भंधा और चन्द्रमासे वारहवें घरमें सूर्य बैठे तत्र वह मनुष्य कारणा होता है ॥ १२ ॥


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