मिलान के सर्वशुद्ध नियम
1.कुण्डली मिलान की सही विधि बहुत कम लोगों को मालूम होता है। मिलान करते समय कभी भी जल्दबाजी से काम न लें. यह दो प्राणियों केजीवन-मरण का प्रश्न है। मंगलीक कुण्डली का परस्पर मिलान करते वक्त ज्योतिर्विज्ञों को उपरोक्त श्लोकों का सार ध्यान में लाना चाहिए। परस्पर दोनों कुण्डलियों में उपरोक्त स्थितियों का मिलान हो तो ग्रह एक दूसरे से उत्पन्न दोषों को काट देते हैं। परन्तु मात्र शनि व मंगल से बनने वाले दोष प्रभावी रहते हैं। मिलान में भावों के चक्कर में आकर कभी भी अगर दोनों कुण्डलियों में सातवें में मंगल स्थित हो तो मिलान शुद्ध न माने, ऐसी अवस्था में दोनों के गुप्तांग दूषित हो तो जीवन कष्टपूर्ण रहेगा।
2. यदि एक के मंगल 7वें में हो दूसरे के 8वें में हों तो भी मिलान न करें।
3. समान भाव में मंगल की स्थिति ग्रेनों के जीवन में दोष वृद्धि करेगी।
4.सप्तमेश एवं शुक्र पर तथा सप्तमेश व गुरु पर पड़ने वाले कुप्रभाव हों तो भी मिलान न मानें इससे तलाक कलह प्रभावित रहेंगे।
5. शेष स्थितियों में मिलान श्रेयस्कर होगा।
6. मंगल व सप्तमेश किन नक्षत्रों की दशा में स्थित है उनका भी मिलान के वक्त ज्ञान कर लेना सूक्ष्मतः प्रभावी होगा। यदि कारक व शुभ ग्रह नक्षत्रों में स्थिति होगी तो मिलान सुन्दर अन्यथा मध्यम व अन्य योगों में कनिष्ठ रहेगा। अतः कुण्डली का मिलान करने वालों को ऐसे स्थाई मामलों में सुयोग्य ज्योतिषी की सलाह ही लेनी चाहिए व भावी जीवन में दम्पति का जीवन सुखमय हो यह परोपकार लक्ष्य में रख लेना चाहिए।
7. उचित तांत्रिक मांत्रिक प्रयोगों से उप्तका पालन भी यदि अभीष्ट हो तो स्पष्ट बता देना चाहिए। विवाह की स्थिति में तो हम विचार कर ही लेते हैं कि-
वरस्य भास्करवलं, कन्यायाश्च गुरोर्बलम्।
द्वयोश्चन्द्रबलं ग्राहां, विवाहो नान्यथा भवेत् ।।
अतः मंगलीक कन्या की गुरु की स्थिति मिलान के बाद भी निर्बल लगे तो उसे विवाह से पूर्व पुखराज रत्न सवा पांच रती के वजन में धारण करा देना चाहिए। चाहे जिस लग्न की कुण्डली हो या न हो पुखराज रत्न को धारण करना हर युवती के लिए शुभ माना गया है। हां अगर वह स्वयं आत्मनिर्भर और: नौकरी करती हो तो कुण्डली की ग्रह स्थिति देखकर के रत्न पहनावें और उसमें भाग्येश व लग्नेश में से जो भी शुभ हो उसका योग करावें।
8. पुरुष को शुक्र की स्थिति स्पष्ट देखकर उसका पालन करने से मंगल के मिलान के बाद भी दम्पत्ति सुख पाएंगे, अन्यथा नहीं।
मंगल का मिलान स्पष्ट सुनिश्चित होने के बाद हमें अष्टकूट मिलान की ओर आगे बढ़ना चाहिए। आजकल पंचाग में बनी अष्टकूट टेबल को देखकरफटाफट गुण बता दिए जाते हैं। वे निर्णय भी गलत होते हैं क्योंकि वे एकांकी होते हैं। अष्टकूट मिलान हेतु 1. वर्ग, 2. वैश्य, 3. तारा, 4. योनि, 5. ग्रहमंत्री, 6. गणमैत्री, 7. भकूट, 8. नाड़ी। सभी का अलग-अलग मिलान करना चाहिए।
10. यदि कुण्डली मिलान को सौ में से नम्बर दिए जाए तो पचास नम्बर मंगल को मिलेंगे। मंगल के मिलान होते ही कुण्डली 50 प्रतिशत मिल जाती है। बाकी अष्टकूट से प्राप्त होने वाले नम्बर भी जोड़ दें। मानों किसी जातक को अष्टकूट से 18 नम्बर मिले। मंगल मिल गयातो 50+18 कुल मिलान 68 उत्कृष्टता को धारण किए हुए है। ऐसा स्पष्ट जानना चाहिए।
11. अष्टकूट मिलान आजकल कम्प्यूटर से होता है। वह उत्तम है। उसमें गलती बिल्कुल नहीं होती। परन्तु अंतिम निर्णय तो विद्वान् ज्योतिषाचार्य को ही करना होता है, वहीं श्रेष्ठ है क्योंकि कम्प्यूटर लगा है। रोज के पचासों मिलान होते हैं पर अंतिम रूप से सारांशत हम स्वयं व्यकिागत रुचि लेकर जो निर्णय . देंगे. वहीं सही होगा। कम्प्यूटर मानव कार्यों का सर्वोतम सहायक है, पर सब कुछ नहीं।
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