Sunday, June 21, 2026


अथ नवांश फल 

पिशुनश्चपलो दृष्टः पापकर्मा निराकृतिः । 

परेषां व्यसने सक्तःप्रथमांशे प्रजायते ॥ १ ॥

अपने जन्म राशि के प्रथम नवांश में जन्म लेने वाला मनुष्य चुगलखोर, बडा चपल, पापकर्म करने वाला, बुरी खरत वाला, हर एक जीवको दुःखदायी होता है ॥ १ ॥

उत्पन्नविभवो भोक्ता संग्रामे विगतस्पृहः ।

गांधर्वप्रमदासक्तो द्वितीयांशे प्रजायते ॥ २ ॥

और लग्न के दूसरे नवांश में जन्म लेने वाला मनुष्य उत्पन्न हुए विभवका भोक्ता, लडने में इच्छा रहित, गान विद्या और त्रियों में आसक्त होता है ॥ २ ॥

धर्मिष्ठः संततव्याधिःसर्वसारज्ञ एव च ।

 सर्वज्ञो देवताभक्तस्तृतीयांशे प्रजायते ॥ ३ ॥

और जिसका जन्म लग्नके तीसरे नांशमें होता है वह मनुष्य धर्मात्मा, निरन्तर रोगी, सबों के अभिप्राय का जानने वाला, सर्वज्ञ, और वैवतों का भक्त होताहै ॥

चतुर्थांशेऽभिजातस्तु दीक्षितो गुरुभक्तिमान् । 

यत्किंचिद्धरणौ वस्तु तत्सर्वं लभते हि सः ॥ ४ ॥

और जो लग्न के चतुर्थ नवांश में जन्म लेता है वह मनुष्य दीक्षित गुरु जनों में भक्ति रखने वाला और जो कुछ भूमि में बस्तु है उस सक्केा प्राप्त करने याला होता है ॥ ४ ॥

सर्वलक्षणसंपन्नो राजा भवति विश्श्रुतः । 

दीर्घायुर्वहुपुत्रश्च जायते पंचमांशके ॥ ५ ॥

और जो मनुष्य लग्न के पंचम नवांश में जन्म लेता है वह सब लक्षणों से संपन्न जगत् में विख्यात राजा, दीर्घायु और बहुत पुत्र वाला होता है ।॥ ५ ॥

स्त्रीनिर्जितःशुमैर्हानो बहुमानी नपुंसकः । 

अर्थध्वंसी प्रमाथी च षष्ठांशे जायते नरः ॥ ६ ॥

और जिसका लग्न के 6टे नवमांश में जन्म होता है वह मनुष्य स्त्री से मैथुन में हारने वाला, शुभ से पर्जित, बहुत अभिमानी, नपुंसक, धनका नाश करने वाला और प्रमाथी होता है ॥ ६ ॥

विक्रांतो मतिमाञ्छूरः संग्रामेष्वपराजितः । 

महोत्साही च संतोषी जायते सप्तमांशके ॥ ७॥

और लग्न के सप्तम अंशका जन्म लेने वाला पुरुष श्डां पर।कभी, बुद्धिमान्, शरबीर स'ग्राम में न हारने वाला, बडा उत्साही और संतोषी होता है ॥ ७ ॥

कृतघ्नो मत्सरी क्रूरः क्लेशभागी बहुप्रजः । 

फलकाले परित्यागी जायते चाष्टमांशके ॥ ८ ॥

और लग्न के अष्टम नवमांश का जन्म लेने वाला मनुष्य बडी कृतघ्न, मत्सरता करने वाला, बडा क्रूर लेशका भोगने वाला, बहुत सन्तान वाला और फल के समय व्याग करने वाला होतो हैं ॥ ८ ॥

क्रियासु कुशलो दक्षःसुप्रतापी जितेंद्रियः । 

भृत्यैश्व वेष्टितो नित्यंजायतेऽय नवांशके ॥ ९ ॥

और लग्न के नवे नवमांश में जन्म लेने वाला मनुष्य अनेक क्रियाओं में कुशल, बडा चतुर, बडां प्रतापी, इन्द्रियों का जीतने बोला और अनेक भृत्य रखने बोला होता है। ६। 

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