Sunday, June 21, 2026

अथ गणफलम् ।

सुंदरो दानशीलश्च मतिमान्सरलःसदा । 

अल्पभोजी महाप्राज्ञो नरो देवगणे भवेत् ॥ १ ॥

जिस पुरुप का देवगण होता है वह पुरुप स्वरूप से सुन्दर, दान करने में स्वभाव रखने वाला, बुद्धिमान, बडो सरल, अल्प भोजन करने वाला और बडा बुद्धिमान होता है ॥ १ ॥

मानी धनी विशालाक्षो लक्ष्यवेधी धनुर्धरः ।

 गौरःपौरजनग्राही जायते मानवे गणे ॥ २ ॥

जिस पुरुपका पुरुपगण होता है वह पुरुप अधिमानी, धनवान, विशाल नेत्रों वाला, लक्ष्य (निशाना) वेधने वोला, धनुप धारण करने वाला, गौर अंग वालो और पुरवासी पुरुषों के साथ सहानुभूति करने वाला है।ता है ॥ २ ॥

उन्मादी भीषणाकारः सर्वदा कलिवल्लभः । 

पुरुषो दुःसहं बते प्रमेही राक्षसे गणे ॥ ३ ॥

जिस पुरुप का राक्षसगण होता है वह पुरुप बडा उन्मादी, भय कर आकार वाला, सब समय कलहप्रियः दुर्वाक्य बोलने वाला और प्रमेह के रोग से युक्त होता है ॥ ३ ॥

No comments:

Post a Comment