अथ योनिफलम् ।
स्वच्छंदः सद्गुणःशूरस्तेजस्वी घर्घरेश्वरः ।
स्वामिभक्तस्तुरंगस्य योन्यां जातो भवेन्नरः ॥ १ ॥
जिस पुरुषकी अश्वयोनि होती है वह पुरुष स्वेच्छाचारी, उत्तम गुणोंसे युक्त, शूरवीर, घर्घर स्वर वाला और स्वाभी का भक्त होता है ॥ १
राजमान्यो बली भोगी भूपस्थानविभूषणः ।
आत्मोत्साही नरो जातो गजयोनौ न संशयः ॥ २॥
जिस पुरुष की गज (हाथी) योनि होती है वह राजा से मान पाने वाला बलवान्, भोगों का भोगने वाला, रोज स्थानका आभूषण और मनमें उत्साह रखने वाला होता है ॥२॥
स्त्रीणां प्रियःसदोत्साही बहुवाक्यविशारदः ।
स्वल्पायुश्च नरोजातः पशुयोनौ न संशयः ॥ ३ ॥
और जिसकी पशु योनि होती है यह मनुष्य स्रियों का प्रिय सदा उत्साह रखने वाला, मनेक प्रकार के वाक्यों के कहने में कुशल; अल्पायु होता है ॥३॥
दीर्घरोषः सदा क्रूर उपकर्कारं न गृह्यते ।
चैपलो रसनालौल्यः सर्पयोनौ न संशयः ॥ ४ ॥
और जिसकी सर्पयोनि होती है वह मनुष्य बडा क्रोधी सब समय क्रूरता युक्त, किये हुए उपकार का न मानने वाला, बडा चपत्न जीभ से लेालता युक्त (हरएक वस्तु पर मन चलाने वाला) होता है ॥ ४ ॥
सोद्यमः सुमहोत्साही शूरःस्वज्ञातिविग्रही ।
मातृपित्रोः सदा भक्तः श्वानयोनौ समुद्भवः ॥ ५ ॥
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जिसकी श्व (कुत्ता) योनि होती है वह मनुष्य उद्यम करने वाला बडी उत्साही, शूरवीर, अपनी जाति से विगाड रखने वाला और अपने माता पितां का सदा भक्त होता है ।। ५ ॥
स्वस्वकार्ये शूरदक्षो मिष्टान्नाहारभोजनः ।
निर्दयो दुष्टसद्भावीं'नरो मार्जारयोनिजः ॥ ६ ॥
और जिसकी मार्जार ( बिलाब) योनि होती है यह मनुष्य अपने निज काम में शूरवीर; चतुर, मीठे अन्न का भोजन करने वाला, बडा निर्दयी दुष्टों से सद्भाव (प्रेम) रखने वाला होता है ॥ ६ ॥
महद्विकमयोद्धापि-ईश्वरो विभवेश्वरः ।
परोपकारी नित्यं च मेषयोनौ भवेन्नरः ॥ ७ ॥
और जिस मनुष्य की मेष ये।नि होती है वह बडा पराक्रमी सब कार्यों के करने में समर्थ, बहुत धनका स्वामी और नित्य परोपकार करने वाला होता है ॥ ७॥
बुद्धिमान्वित्तसंपूर्णः स्वकार्यकरणोद्यतः ।
अप्रमत्तोऽप्यविश्वासी नरोमूषकयोनिजः ॥ ८ ॥
और जिसका मूषक योनि में जन्म होता है यह मनुष्य बुद्धिमान् धन सम्पन्न अपने कोम करने में सदा उद्यत, सदो सावधान और सब का अविश्वास करने चाला, युद्ध करने वाला होता है ॥ ८ ॥
स्वधर्मे तु सदाचारःसत्क्रियासद्द्भणान्वितः ।
कुटुम्बस्य ससुद्धर्ता सिंहयोनिभवो नरः ॥ ९ ॥
जिस मनुष्य की सिंह योनि होती है वह अपने धर्म में सच्चा आचार रखने वाला; उत्तम क्रिया तथा उत्तम गुणों से सम्पन्न और कुटुम्ब का उद्धार करने बाला होता है ॥ ६ ॥
संग्रामे विजयी योद्धा सकामस्तु बहुप्रजः ।
वाताधिको मंदमतिर्नरो महिषयोनिजः ॥ १०॥
जिसकी महिष योनि होती है वह मनुष्य संग्राम में विजय पाने वाला योद्धा, कोमी, अनेक संतानों से युक्त, बांतपकृति वाला और बडा मंदबुद्धि होतो है ॥१०॥
स्वच्छन्दोऽर्थरतो ग्राही दीक्षावान्स विशुःसदा । आत्मस्तुतिपरोनित्यं व्याघ्रयोनिभवो नरः ॥ ११ ॥
जिसकी व्याघ योनि होती है वह मनुष्य स्वेच्छाचारी, धन के उद्यम में निरत, सदुपदेशों का ग्रहण करने वाला, दीक्षायुक्त सदा समर्थ आत्मस्तुति करने में तत्पर होता है ॥ ११ ॥
स्वच्छंदः शांतसद्धत्तिःसत्यवान्स्वजनप्रियः ।
धर्मिष्ठो रणशूरश्च यो नरो मृगयोनिजः ॥ १२ ॥
और जो मृग योनि याला मनुष्य होता है वह स्वतन्त्रता पूर्वक रहने वाला, शांत प्रकृति, उत्तम वरताब पाला; सत्य वाक्य बोलने वाला; अपने मनुष्यों से स्नेह करने वाला, धर्माचरण करने वाला, युद्ध में शूरवीर होता है ॥ १२ ॥
चपलो मिष्टभोगी चार्थलुब्धश्च कलिप्रियः ।
सकामः सत्त्रजःशूरो नरो वानस्योनिजः ॥ १३ ॥
और जिसकी वानर योनि होती है, यह मनुष्य बडा चपल, मीठी चीज खाने याला; धन का लामी, कलह प्रिय, काम सहित अच्छी सन्तान वाला और शूरवीर होयों है ॥ १३ ॥
परोपकरणे दक्षे वित्तेश्वरविचक्षणः ।
पितृमातृप्रियो नित्यंनरो नकुलयोनिजः ॥ १४ ॥
और जिसकी नकुल योनि होती है यह मनुष्य परे। पकार करने में प्रवीण धनि यों में प्रधान; वडा चतुर और नित्य माता पितासे स्नेह करने वाला होता है।
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